Greater Noida / भारतीय टॉक न्यूज़: दिल्ली-एनसीआर के विकास की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसका नाम है ‘नया नोएडा’। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र (DNGIR) के रूप में विकसित होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। सरकार द्वारा 80 गांवों को अधिसूचित किए जाने के साथ ही इस भविष्य के शहर का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। अब यहाँ किसी भी निर्माण कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण, यानी जमीन अधिग्रहण, जल्द ही शुरू होने वाला है।
मुआवजा दर पर मंथन: किसान हितों को प्राथमिकता
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने आपसी सहमति का रास्ता चुना है। सबसे बड़ी चुनौती किसानों के लिए मुआवजे की दर तय करना है, जिसके लिए अगले सप्ताह एक उच्च-स्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर के जिलाधिकारियों के साथ नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी शामिल होंगे।
प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम के अनुसार, मुआवजा दर तय करते समय कई महत्वपूर्ण मानकों को ध्यान में रखा जाएगा:
🔸रणनीतिक लोकेशन: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गांवों की दूरी।
🔸 जमीन की उपयोगिता: भूमि का मौजूदा उपयोग और भविष्य की औद्योगिक क्षमता।
🔸सर्किल रेट: विशेष रूप से बुलंदशहर के 60 गांवों का मौजूदा सर्किल रेट।
इन सभी पहलुओं का आकलन कर एक ऐसी मुआवजा दर तय की जाएगी, जो किसानों के हितों की रक्षा करे और विकास का मार्ग भी प्रशस्त करे।
चार चरणों का मास्टर प्लान: सुनियोजित विकास की रूपरेखा
‘नया नोएडा’ को कुल 20,911 हेक्टेयर भूमि पर चार चरणों में बसाने की योजना है। यह एक सुनियोजित और चरणबद्ध विकास होगा, जिसकी रूपरेखा इस प्रकार है:
1.पहला चरण (2023-2027): इस चरण में 3,165 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने अपने बजट में ₹1000 करोड़ का प्रावधान किया है। शुरुआती बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ₹8,500 करोड़ की आवश्यकता होगी। इस चरण में लगभग ₹50,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है, जिससे 1 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
2. दूसरा चरण (2027-2032): 3,798 हेक्टेयर भूमि का विकास।
3. तीसरा चरण (2032-2037): 5,908 हेक्टेयर भूमि का विकास।
4. चौथा चरण: शेष 8,040 हेक्टेयर से अधिक भूमि का विकास।
विकास की शुरुआत ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जीटी रोड के जंक्शन के पास स्थित गांवों, जैसे जोखाबाद और सांवली, से की जाएगी। इन्हीं गांवों में परियोजना का अस्थायी कार्यालय भी बनाया जाएगा।
औद्योगिक हब के रूप में ‘नया नोएडा’ का विजन
‘नया नोएडा’ को मुख्य रूप से एक औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लैंड यूज का बड़ा हिस्सा उद्योगों के लिए आरक्षित है, जो इसे निवेश और रोजगार का एक प्रमुख केंद्र बनाएगा।
लैंड यूज का विस्तृत विवरण:
🔸औद्योगिक: 8811 हेक्टेयर
🔸यातायात और परिवहन: 3282.59 हेक्टेयर
🔸हरित क्षेत्र/पार्क: 3173.94 हेक्टेयर
🔸आवासीय: 2477 हेक्टेयर
🔸संस्थागत (PSP): 1682.15 हेक्टेयर
🔸वाणिज्यिक: 905.97 हेक्टेयर
🔸अन्य सुविधाएं: 769.75 हेक्टेयर
इस नए शहर की कुल अनुमानित आबादी 6 लाख होगी, जिसमें से 3.5 लाख लोगों के अन्य क्षेत्रों से माइग्रेट होने की संभावना है। यह परियोजना एनसीआर के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है।

