Greater Noida / भारतीय टॉक न्यूज़ (संवाददाता) : धान की कटाई शुरू होने के साथ ही गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन ने किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे खेतों में पराली न जलाएं, अन्यथा उन्हें 15,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसके साथ ही दोषी किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।
उपकृषि निदेशक राजीव कुमार ने बताया कि धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई की जल्दबाजी में कई किसान पराली को खेत में ही जला देते हैं। यह प्रक्रिया न केवल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक है। पराली का धुआं वायु प्रदूषण को गंभीर स्तर तक बढ़ा देता है और मिट्टी में मौजूद किसान-मित्र कीटों को भी नष्ट कर देता है, जिससे भूमि की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित
प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है।
🔸ग्राम पंचायत से लेकर तहसील स्तर तक विशेष सचल दलों का गठन किया गया है, जो खेतों पर नजर रखेंगे।
🔸सैटेलाइट के माध्यम से भी पराली जलाने की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिसका बुलेटिन केंद्र सरकार द्वारा प्रतिदिन जारी किया जाता है।
🔸यदि कोई किसान पराली जलाते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ एनजीटी अधिनियम की धारा 24 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने की राशि भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर 2,500 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक हो सकती है।
पराली को बनाएं खाद
जिला प्रशासन ने किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के लाभकारी तरीकों को अपनाने की सलाह दी है। कृषि विभाग द्वारा पराली को खेत में ही गलाकर खाद बनाने के लिए विशेष मशीनें और योजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों से अपील की गई है कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएं। पराली को खाद के रूप में उपयोग करने से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी, जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।

