Greater Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़: देश को झकझोर देने वाले चर्चित निठारी हत्याकांड में 18 साल से जेल में बंद सुरेंद्र कोली को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले मंगलवार को निठारी से जुड़े अंतिम मामले में भी बरी किए जाने के बाद कोली की रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद कोली ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और चुपचाप चला गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका पर दिया था आदेश
सुरेंद्र कोली पिछले 18 वर्षों से लुक्सर जेल में बंद था। बीते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े अंतिम केस में अपना फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने सुरेंद्र कोली द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव याचिका को स्वीकार कर लिया था।
इस याचिका में कोली ने उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पहले उसकी सजा को बरकरार रखा था। कोर्ट ने इस मामले में कोली की सजा को रद्द करते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, जिसके बाद बुधवार को उसकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई।
क्या था दिल दहलाने वाला निठारी कांड?
यह मामला दिसंबर 2006 का है, जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कोठी नंबर D-5 से एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया था। इस कोठी के अंदर और बाहर के नाले से दर्जनों इंसानी कंकाल बरामद किए गए थे, जिनमें छोटे बच्चों से लेकर वयस्क तक शामिल थे।
इस मामले की जांच यूपी पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के बाद कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था।
रिहाई से पीड़ितों के जख्म हरे हुए
एक तरफ जहां सुरेंद्र कोली 18 साल बाद जेल से बाहर आ गया है, वहीं दूसरी ओर निठारी कांड के पीड़ित परिवारों में कोर्ट के इस फैसले को लेकर गहरा असंतोष है। कोली की रिहाई ने उनके पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।
कांड में मारी गई 8 साल की पूजा की मां शांति ने सवाल उठाया कि अगर उनकी बेटी को पंढेर और कोली ने नहीं मारा, तो फिर कातिल कौन है? उन्होंने आरोप लगाया कि कोठी में विदेशी डॉक्टर आते थे और बच्चों की हत्या कर मानव अंगों की तस्करी की जाती थी, क्योंकि कई मृतकों के सिर और पैर तो मिले, लेकिन धड़ (सीना) गायब था। पीड़ित परिवार आज भी न्याय की आस में है।

