बांग्लादेश: शेख हसीना को मौत की सजा, मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया; भारत से प्रत्यर्पण की मांग

Bangladesh: Sheikh Hasina sentenced to death, found guilty of crimes against humanity; India seeks extradition

Partap Singh Nagar
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बांग्लादेश: शेख हसीना को मौत की सजा, मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया; भारत से प्रत्यर्पण की मांग

New Delhi/ भारतीय टॉक न्यूज़: बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में, देश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 में हुए छात्र-आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले के तुरंत बाद, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को प्रत्यर्पित करने की औपचारिक मांग की है।

न्यायाधिकरण का ऐतिहासिक फैसला

सोमवार, 17 नवंबर, 2025 को ढाका स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 (ICT-1) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुनाया। जस्टिस एमडी. गुलाम मोर्तुजा मजुमदेर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में (in absentia) दोषी करार दिया।

न्यायाधिकरण ने माना कि 2024 के “जुलाई विद्रोह” (July Uprising) के दौरान, तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ घातक बल प्रयोग का आदेश दिया था। उन पर लगे मुख्य आरोपों में शामिल हैं:

🔸नरसंहार और हत्या का आदेश: प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देना।

🔸मानवता के खिलाफ अपराध: नागरिकों पर व्यापक और व्यवस्थित हमले की “सुपीरियर कमांड रिस्पॉन्सिबिलिटी” (वरिष्ठ कमांडर की जिम्मेदारी) लेना।

🔸उत्पीड़न और हिंसा: जुलाई और अगस्त 2024 के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों में कथित तौर पर 1,400 से अधिक लोगों की मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया।

शेख हसीना के अलावा, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इन्हीं आरोपों में अनुपस्थिति में मौत की सजा दी गई है। हालांकि, मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपी, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IGP) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून, सरकारी गवाह बन गए थे। अपराध स्वीकार करने और गवाही देने के कारण उन्हें 5 साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

भारत पर प्रत्यर्पण का दबाव

फैसला आते ही बांग्लादेश सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए भारत सरकार से संपर्क साधा है। बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच 2013 में हुई प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को तुरंत सौंपने की मांग की है।

ज्ञात हो कि 5 अगस्त, 2024 को अपनी सरकार गिरने के बाद शेख हसीना कथित तौर पर भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश की वर्तमान सरकार का तर्क है कि सजायाफ्ता अपराधियों को कानून का सामना करने के लिए वापस भेजा जाना चाहिए।

हालांकि, इस मांग ने भारत को एक जटिल कूटनीतिक स्थिति में डाल दिया है। प्रत्यर्पण संधि में एक प्रावधान है कि यदि किसी अपराध को “राजनीतिक प्रकृति” का माना जाता है, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस मामले को राजनीतिक उत्पीड़न के रूप में देख सकता है और प्रत्यर्पण की मांग को खारिज कर सकता है।

शेख हसीना ने फैसले को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया

निर्वासन से, शेख हसीना ने इस पूरे मुकदमे को एक “दिखावा” और “राजनीति से प्रेरित पूर्वाग्रह” करार दिया है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि यह फैसला एक “अनिर्वाचित सरकार” द्वारा बांग्लादेश से अवामी लीग को खत्म करने और राजनीतिक बदला लेने के लिए किया गया है।

 

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