यमुना खादर: खेती की आड़ में सरकारी जमीन कब्जाने वालों पर प्रशासन का हंटर, 100 हेक्टेयर भूमि बचाने के लिए हुई पैमाइश

Yamuna Khadar: Administration cracks down on those occupying government land under the guise of farming, 100 hectares measured to save land

Partap Singh Nagar
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यमुना खादर: खेती की आड़ में सरकारी जमीन कब्जाने वालों पर प्रशासन का हंटर, 100 हेक्टेयर भूमि बचाने के लिए हुई पैमाइश

 

Greater Noida / भारतीय टॉक न्यूज़ : यमुना के खादर क्षेत्र में हर साल फसल की बुआई के साथ शुरू होने वाले ‘कब्जे के खेल’ पर इस बार प्रशासन ने समय रहते नकेल कस दी है। सरकारी जमीन को भू-माफियाओं और अवैध कब्जेदारो से बचाने के लिए किरावली तहसील प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम ने यमुना की तलहटी में उतरकर न केवल एक-एक इंच जमीन की पैमाइश की, बल्कि मुनादी कराकर स्पष्ट चेतावनी भी दी कि सरकारी जमीन पर हल चलाया तो जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

जुगसेना और सींगना गांव में चला प्रशासन का फीता

यमुना खादर के जुगसेना और सींगना गांवों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें पुरानी हैं। अक्सर देखा गया है कि रबी की फसल (गेहूं, आलू, सरसों) की बुआई के समय कुछ दबंग और भू-माफिया सरकारी जमीन को अपनी बताकर उस पर कब्जा जमा लेते हैं। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए एसडीएम किरावली नीलम तिवारी के निर्देश पर प्रशासन पहले ही सक्रिय हो गया।

मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सरकारी और निजी भूमि का सीमांकन (Demarcation) किया। फीता डालकर यह सुनिश्चित किया गया कि कौन सी जमीन कास्तकारों की है और कौन सी सरकार की।

मुनादी कर दी गई खुली चेतावनी: कब्जा किया तो होगी एफआईआर

पैमाइश के साथ-साथ प्रशासन ने जुगसेना और सींगना गांवों में ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी (सार्वजनिक घोषणा) भी कराई। ग्रामीणों को साफ लफ्जों में बता दिया गया है कि वे अपनी निजी भूमि पर खेती करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं, लेकिन अगर किसी ने सरकारी जमीन पर फसल बोई या कब्जा करने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज होगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा।

100 हेक्टेयर भूमि पर थी नजर

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यमुना की तलहटी में इन गांवों के आसपास करीब 100 हेक्टेयर सरकारी भूमि है, जिस पर हर साल अवैध कब्जे का खतरा बना रहता है। कब्जेदार यहां गेहूं, आलू और सरसों जैसी फसलें उगाकर मोटा मुनाफा कमाते थे। पिछले साल भी प्रशासन ने रोक लगाई थी, लेकिन कब्जेदार अपनी हरकतों से बाज नहीं आए थे। इसी को देखते हुए इस बार बुआई के पीक सीजन से पहले ही “प्रिवेंटिव एक्शन” लिया गया है।

अधिकारियों का बयान

एसडीएम किरावली, नीलम तिवारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा:

सरकारी भूमि को चिह्नित कर लिया गया है। सरकारी संपत्ति पर कोई भी फसल तैयार नहीं कर सकता। यदि दोबारा कब्जे का प्रयास हुआ तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। निगरानी के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में एक विशेष राजस्व टीम गठित की गई है जो क्षेत्र में सक्रिय रहेगी।

 

 

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