Greater Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़: देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवान के परिवार के प्रति भारतीय सेना का अटूट रिश्ता एक बार फिर भावुक और प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित डाबरा गांव में मंगलवार की शाम एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
गांव के शहीद सुरेश सिंह भाटी की बेटी मुस्कान भाटी की शादी में, उनके पूर्व रेजिमेंट से पंजाब के फिरोजपुर छावनी से लगभग 50 जवानों से भरी एक बस अचानक आकर रुकी। यह सामान्य आगमन नहीं, बल्कि शहीद पिता के अधूरे सपने को पूरा करने और उनकी शहादत को सम्मान देने का अद्भुत संकल्प था।
पिता की कमी पूरी करने पहुंचे 50 साथी
शहीद सुरेश सिंह भाटी ने 2006 में जम्मू-कश्मीर के बारामूला में आतंकी हमले का सामना करते हुए देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बेटी की शादी के अवसर पर पिता की अनुपस्थिति हर किसी को कचोट रही थी।
सेना के जवान, जिन्होंने शहीद सुरेश भाटी के साथ कई अभियानों में हिस्सा लिया था, उन्होंने फैसला किया कि वे केवल औपचारिक शोक संदेश नहीं भेजेंगे, बल्कि साथी की बेटी का कन्यादान कर अपनी जिम्मेदारी को भावनात्मक रूप से निभाएंगे। विवाह स्थल पर जब 50 से अधिक जवान पूर्ण सैन्य गणवेश में पहुंचे और ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंजे, तो पूरे गांव का माहौल गर्व और भावुकता से भर गया।
मंडप में निभाई ‘सैन्य कन्यादान’ की रस्म
मंडप में पहुंचकर सबसे पहले जवानों ने शहीद सुरेश भाटी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने परिवार से कहा, “आज हम सब मिलकर अपने साथी की बेटी का कन्यादान करेंगे। सुरेश भाटी हमारे परिवार का हिस्सा थे। उनकी बेटी हमारी बेटी है।”
इस घोषणा के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कन्यादान की पवित्र रस्म शुरू हुई। एक सैन्य अधिकारी ने परंपरा के अनुरूप, जल और पुष्प के साथ, दुल्हन के हाथ को दूल्हे (विजय चपराना) के हाथ में सौंपते हुए यह पवित्र संकल्प दोहराया। इस दौरान, पंडाल में बैठे हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
दुल्हन बोली- “लगा जैसे पापा सचमुच साथ हैं”
कन्यादान की रस्म पूरी होने पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जवानों ने मुस्कान को आशीर्वाद दिया और परिवार को यह भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना हमेशा अपने शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
दुल्हन मुस्कान भाटी ने भावुक आंखों से कहा, “मुझे हमेशा लगता था कि मेरी शादी पर पापा बहुत याद आएंगे, लेकिन आज जब पापा की यूनिट के इतने सारे अंकल आए और उन्होंने मेरा कन्यादान किया, तो मुझे लगा कि पापा सचमुच मेरे साथ हैं।”
शहीद सुरेश भाटी का बड़ा बेटा हर्ष भाटी भी वर्तमान में सेना में है और कश्मीर के बारामूला में तैनात है। जवानों ने हर्ष को भी पिता के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।
यह अनोखी शादी न केवल डाबरा गांव, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो शहादत के प्रति सम्मान, भाईचारा और मानवीय संवेदना की एक बेमिसाल कहानी है।

