इंदौर में ज़हरीले पानी से 9 बच्चों की दर्दनाक मौत: मंत्री के लिए ‘फोकट’ बना इंसाफ़ का सवाल

इंदौर समाचार: दूषित पेयजल के कारण 9 बच्चों की मौत। स्वच्छ शहर के दावों और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर उठे सवाल।

Chirag Rathi
Chirag Rathi - Content writer
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इंदौर में दूषित पानी से 9 बच्चों की मौत: सबसे स्वच्छ शहर के दावों पर बड़ा सवाल

 

इंदौर/भारतीय टॉक न्यूज़: इंदौर हिंदुस्तान का सबसे स्वच्छ शहर है। लेकिन ये स्वच्छता महज कागजी नजर आती है । क्योंकि हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने की वजह से लगभग 9 बच्चों की मौत हो चुकी है । तो ये स्वच्छता कैसी है समझ से परे  है । जहा एक तरफ हम विश्वगुरु बनने के सपने देख रही हैं वहीं पर हमारी जनता  दूषित  पानी दूषित हवा  की वजह से दम तोड़ रही है। 

दूषित पानी और मासूम मौतें

हाल ही में इंदौर के कुछ इलाकों में नल के पानी के दूषित होने की खबरें सामने आईं। उल्टी-दस्त, संक्रमण और गंभीर बीमारी के बाद मासूम बच्चों की जान चली गई। ये मौतें सिर्फ़ बीमारी से नहीं हुईं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की नाकामी से हुईं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि

  • क्या पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच हो रही थी?

  • अगर हो रही थी, तो दूषित पानी सप्लाई में कैसे पहुंचा?

  • और अगर नहीं हो रही थी, तो जिम्मेदार कौन है?

जवाबदेही /जिम्मेदारी पर मंत्री जी का जवाब

इंदौर 1 विधानसभा से विधायक और बीजेपी के वरिष्ट मंत्री   कैलाश विजयवर्गीय से NDTV के पत्रकार ने बच्चों की मौत पर सवाल किया तो मंत्री जी का जवाब आया की ‘फोकट के सवाल मत पूछो‘ और मंत्री जी का ये जवाब बिल्कुल वाजिब है क्योंकि मंत्री जी ने पानी हवा का ठेका थोड़ा ले रखा है। आप उसने पाकिस्तान के बारे में सवाल कीजिए आप उनसे विश्व गुरु बनने की तरकीब पूछिए। जब खुद नेताओ को खुदा बनाओगे तो उनसे यही जवाब पाओगे ।

जिनके बच्चे गए उनके गए इसमे मंत्री जी की क्या गलती ? नववर्ष के वक्त पर मंत्री जी से कोई ऐसे सवाल करेगा तो मंत्री जी को तो गुस्सा आएगा ही ।

यही होता है जब हम नेताओ को खुदा बना देते है। पार्टी विशेष को देश , आम जनता से अधिक तरजीह देने लगते है । हम भूल जाते है की वो जनता के सेवक है । जनता ने ही उनको वोट देकर नेता बनाया है इसलिए अपने अधिकारों को समझो और सवाल करो इन सत्ताधिशो से  की क्या इसलिए बनाए गए थे ?

लोकतंत्र में नेता नहीं बल्कि जनता खुदा  होती है , जिस दिन जनता अपने हिस्से के सवाल करने लगेगी तो इनके गले सुख जाएंगे।

निष्कर्ष : समर्थक बनें, गुलाम नहीं

  • नेताओ को वोट विश्वगुरु बनाने के लिए दोगे तो यही हाल होगा।
  • जबब तक ये नहीं जानोगे की समर्थक होना गुलाम होना नहीं होता तब तक आपके बच्चे युही दम तोड़ते रहेंगे।
  • और नेताओ के लिए आपके बच्चों की मौत युही फोकट के सवाल बनते रहेंगे।
  • हवा में जहर पानी में जहर और बनना है विश्वगुरु इन नेताओं के मूक दर्शक बने रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि सवाल पूछने पड़ेंगे। ये कहेंगे हम विश्व गुरु बनाएंगे तो हमारा सवाल होना चाहिए की कैसे बनाओगे?
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