नोएडा/गौतमबुद्ध नगर/ भारतीय टॉक न्यूज़ : समाजवादी पार्टी (सपा) के गढ़ में इन दिनों ‘भीतरी जंग’ तेज हो गई है। जनपद गौतमबुद्ध नगर में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही रस्साकशी अब सोशल मीडिया की सड़कों पर आ गई है। पार्टी के भीतर जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों को लेकर मचे घमासान ने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा विवाद दावेदार देवेंद्र टाइगर को लेकर है, जिनके खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं ने सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से शिकायत करते हुए ट्विटर पर अभियान छेड़ दिया है।
सोशल मीडिया पर ‘ट्विटर वॉर’
पिछले 24 घंटों से ट्विटर (X) पर आकाश भाटी और विकास भाटी जैसे अकाउंट ने देवेंद्र टाइगर की कुछ तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में देवेंद्र टाइगर कथित तौर पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि देवेंद्र टाइगर की पृष्ठभूमि भाजपा से जुड़ी हुई है और उनके सगे भाई भाजपा किसान मोर्चा में अहम पद पर हैं।


ट्वीट में अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा गया है, “माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी, भाजपा की पृष्ठभूमि से जुड़े देवेंद्र टाइगर जनपद में सपा की कमान संभालने के लिए जोड़-तोड़ कर रहे हैं। पार्टी हित में कृपया संज्ञान लें।”
पुरानी सुगबुगाहट और गुटबाजी
यह पहली बार नहीं है जब गौतमबुद्ध नगर में जिलाध्यक्ष की रेस को लेकर विवाद हुआ है। इससे पहले भी पार्टी के कई पुराने धुरंधर इस पद के लिए अपनी दावेदारी ठोक चुके हैं। जिले में सपा फिलहाल कई खेमों में बंटी नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं का एक गुट इस बात से नाराज है कि पैराशूट लैंडिंग के जरिए ‘बाहरी’ या ‘विपक्ष’ से संबंध रखने वाले लोगों को संगठन की कमान दी जा सकती है।
लखनऊ तक पहुंची शिकायत की गूँज
विश्वस्त सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में लखनऊ जाकर अखिलेश यादव से मुलाकात कर चुका है। इस गुट ने साक्ष्यों के साथ यह बात रखी है कि अगर भाजपा पृष्ठभूमि वाले किसी व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाया गया, तो जिले में पार्टी का मूल कैडर बिखर सकता है।
क्या कहते हैं सियासी समीकरण?
गौतमबुद्ध नगर जैसे महत्वपूर्ण जनपद में आगामी चुनावों को देखते हुए सपा एक मजबूत और निष्ठावान जिलाध्यक्ष की तलाश में है। लेकिन देवेंद्र टाइगर के फोटो वायरल होने के बाद अब नेतृत्व के सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां जोड़-तोड़ का खेल जारी है, वहीं दूसरी तरफ निष्ठावान कार्यकर्ता ‘साइकिल’ को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
फिलहाल, गेंद अखिलेश यादव के पाले में है। क्या वे कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए किसी पुराने सिपाही पर दांव लगाएंगे या फिर ‘जोड़-तोड़’ की राजनीति अपना असर दिखाएगी? गौतमबुद्ध नगर की सपा राजनीति में आने वाले कुछ दिन काफी निर्णायक होने वाले हैं।

