ग्रेटर नोएडा/ भारतीय टॉक न्यूज़: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित गैंगस्टर रवि काना को जिला एवं सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को हुई अहम सुनवाई के बाद अदालत ने रवि काना की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। बता दें कि 29 जनवरी को बांदा जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद रवि काना ने नोएडा के सेक्टर-63 थाने में दर्ज एक नए मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण ली थी।
अदालत में हुई तीखी बहस
रवि काना की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच जोरदार दलीलें पेश की गईं। आरोपी रवि काना की ओर से प्रसिद्ध अधिवक्ता ललित मोहन गुप्ता ने पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से डीजीसी क्राइम ब्रह्मजीत भाटी ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले के तथ्यों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने रवि काना को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
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बांदा जेल प्रशासन पर उठ चुके हैं सवाल
यह मामला काफी विवादों में रहा है, क्योंकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने बी-वारंट के बावजूद रवि काना को रिहा किए जाने पर बांदा जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा था। दरअसल, जनवरी 2026 में थाना सेक्टर-63 नोएडा में जबरन वसूली का एक नया मुकदमा दर्ज हुआ था। उस समय रवि काना बांदा जेल में बंद था और नोएडा पुलिस ने उसे पेश करने के लिए बी-वारंट जारी कराया था। आरोप है कि बी-वारंट होने और न्यायालयीय कार्यवाही लंबित होने के बावजूद 29 जनवरी को उसे रिहा कर दिया गया। इस प्रशासनिक चूक पर जेल प्रशासन अपना जवाब कोर्ट में दाखिल कर चुका है।

