Greater Noida: रबूपुरा क्षेत्र के दो सगे भाइयों की हत्या के सभी 8 आरोपी कोर्ट से दोषमुक्त; गवाहों के मुकरने से कमजोर पड़ा अभियोजन का केस

रामपुर बांगर गांव में दो सगे भाइयों की हत्या के सभी 8 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। गवाहों के मुकरने से अभियोजन पक्ष का केस कमजोर पड़ा।

Partap Singh Nagar
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Greater Noida: रबूपुरा क्षेत्र के दो सगे भाइयों की हत्या के सभी 8 आरोपी कोर्ट से दोषमुक्त; गवाहों के मुकरने से कमजोर पड़ा अभियोजन का केस

ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : जनपद के रबूपुरा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम रामपुर बांगर के चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव और चश्मदीद गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने के कारण मामले के सभी 8 आरोपियों को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए दोषमुक्त (बरी) करार दिया है।

जिम से लौटते समय घेरकर गोलियों से भूना था

मामला 29 नवंबर 2019 की रात का है। रामपुर बांगर निवासी गिरिराज सिंह ने रबूपुरा कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, उनका बेटा गजेंद्र रबूपुरा में जिम चलाता था। 29 नवंबर की रात करीब 8:30 बजे गजेंद्र अपनी जिम बंद कर कार से गांव लौट रहा था। उसके साथ पीछे दूसरी गाड़ियों में उसका भाई आकाश और गांव के ही सुनील, दीपक, जीतू व सुभाष भी आ रहे थे।

आरोप था कि गांव में कालू के घर के पास आरोपियों ने बुग्गी (बैलगाड़ी) खड़ी कर रास्ता रोक लिया और हथियारों से लैस होकर हमला कर दिया। मुख्य आरोप के अनुसार, मूला नामक युवक ने अपनी राइफल से गोली मारकर गजेंद्र की हत्या की, जबकि भूपन ने राइफल से आकाश पर गोली चलाकर उसकी जान ले ली। इस हमले में सुनील और जीतू भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए थे। पीड़ित पक्ष ने रंजिश के चलते हत्या का आरोप लगाया था।

3 अहम गवाहों का मुकरना आरोपियों के हक में गया

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों— मूला, सुंदर, भूपन, नरेंद्र, सतीश, राकेश, धर्मेंद्र और किरनपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।

लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रमोद सुनपुरा ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा है। इस केस में सबसे अहम मोड़ तब आया जब घटना के समय मौके पर मौजूद और खुद घायल हुए मुख्य गवाह जीतू, सुनील और दीपक कोर्ट में गवाही के दौरान अपने बयानों से मुकर गए। तीनों गवाहों ने घटना स्थल पर हमला होने की बात तो स्वीकार की, लेकिन वे कोर्ट में यह स्पष्ट नहीं कर सके कि हमला इन्हीं आरोपियों ने किया था।

चश्मदीदों के मुकर जाने के कारण अभियोजन पक्ष का केस पूरी तरह कमजोर पड़ गया। साक्ष्यों की कमी और गवाहों के विरोधाभासी बयानों को देखते हुए माननीय न्यायालय ने सभी आठों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।

 

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