Greater Noida News/ भारतीय टॉक न्यूज़: समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी दहेज प्रथा एक बार फिर एक महिला के लिए अभिशाप बन गई। शादी के बाद अतिरिक्त दहेज की न पूरी होने वाली मांगों ने उसे न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ा, बल्कि उसे अपने अजन्मे बच्चे को खोने का असहनीय दर्द भी दिया। यह घटना समाज के उस स्याह पक्ष को उजागर करती है, जहां आज भी एक महिला का मूल्य उसके साथ आने वाले दहेज से आंका जाता है। पीड़िता ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित करने, मारपीट करने, और जबरन गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।
शादी के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न का सिलसिला
वर्ष 2019 में बड़े ही धूमधाम और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ पीड़िता की शादी हुई थी। उसके परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार लगभग 10 से 12 लाख रुपये खर्च किए और गृहस्थी के सामान के साथ सोने-चांदी के आभूषण भी दिए। लेकिन यह सब भी पीड़िता के ससुराल वालों के लालच को शांत नहीं कर सका। आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद पति, सास-ससुर और अन्य सदस्य अतिरिक्त दहेज के लिए उस पर दबाव बनाने लगे। यह मांग समय के साथ बढ़ती गई और पूरी न होने पर उसे ताने और धमकियां दी जाने लगीं।
शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की इंतहा
जब ताने और धमकियों से भी बात नहीं बनी, तो ससुराल वालों ने शारीरिक हिंसा का रास्ता अपना लिया। पीड़िता का आरोप है कि उसके साथ अक्सर मारपीट की जाती थी। यही नहीं, उसके देवर ने भी मौके का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया, जिससे वह और भी सहम गई। यह सब कुछ उसे मानसिक रूप से तोड़ने के लिए काफी था, लेकिन जुल्मों का सिलसिला यहीं नहीं थमा।
मानवता को शर्मसार करती घटना: जबरन गर्भपात
इस बीच पीड़िता गर्भवती हुई। उसे लगा कि शायद बच्चे के आने से घर में खुशियां लौट आएंगी और उसके प्रति ससुराल वालों का रवैया बदल जाएगा। लेकिन उसकी यह उम्मीद भी टूट गई। ससुराल वालों को शक था कि उसके गर्भ में बेटी है। बेटी के जन्म पर फिर से खर्च होने और कोई “फायदा” न होने की सोच ने उन्हें अमानवीय बना दिया।
अजन्मे बच्चे की हत्या
आरोप है कि गर्भ में कन्या भ्रूण होने के संदेह में ससुराल वालों ने उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और आखिरकार, उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन उसका गर्भपात करा दिया गया। इस घटना ने उसे शारीरिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह से तोड़कर रख दिया।
पुलिस की कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
लंबे समय तक उत्पीड़न और असहनीय पीड़ा सहने के बाद, पीड़िता ने आखिरकार अपने मायके वालों की मदद से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पति, देवर और अन्य ससुराल वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं, जिसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट, बलात्कार का प्रयास और जबरन गर्भपात शामिल है, के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि आखिर कब तक महिलाएं दहेज के नाम पर इस तरह की क्रूरता का शिकार होती रहेंगी और कब समाज इस कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त हो पाएगा।

