Greater Noida /भारतीय टॉक न्यूज़: गौतमबुद्धनगर के दादरी स्थित एक निजी अस्पताल पर नवजात शिशु के इलाज में गंभीर लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में दिए गए (संभवतः) ग़लत इंजेक्शन के कारण उनकी नवजात बेटी का हाथ नीला पड़ गया और अब उसमें गैंगरीन के लक्षण पाए गए हैं, जिससे हाथ काटने तक की नौबत आ गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने बुधवार को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता पिता शिवम भाटी के अनुसार, उनकी बेटी का जन्म 5 अक्टूबर को हुआ था। जन्म के तुरंत बाद बच्ची को दादरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्ची को एक इंजेक्शन दिया, जिसके कुछ ही समय बाद बच्ची का एक हाथ नीला पड़ने लगा।
जब परिवार ने इस बारे में डॉक्टरों से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर लापरवाही को छिपाने के लिए बच्ची के हाथ पर पट्टी बांध दी और उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
चाइल्ड पीजीआई में भर्ती है बच्ची, हालत नाजुक
फिलहाल, बच्ची का इलाज नोएडा सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में चल रहा है, जहाँ उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। जांच कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के हाथ में गैंगरीन के लक्षण पाए गए हैं। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि बच्ची की बेहतरी के लिए उसकी कलाई के नीचे का हिस्सा ऑपरेशन के जरिए हटाना पड़ सकता है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि पहले बच्ची को पूरी तरह से स्वस्थ किया जाएगा, उसके बाद ही ऑपरेशन पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
पुलिस की चिट्ठी पर CMO ने लिया एक्शन
पीड़ित पिता शिवम भाटी ने इस मामले में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ दादरी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर थाना प्रभारी ने मामले की जांच के लिए सीएमओ कार्यालय को एक पत्र भेजा। इसी पत्र पर संज्ञान लेते हुए सीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं।
सात दिन में मांगी रिपोर्ट
सीएमओ द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति में दादरी सीएचसी प्रभारी डॉ. रविंद्र कुमार, जच्चा-बच्चा अस्पताल प्रभारी डॉ. रविंद्र सिरोहा और जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजेश कुमार को शामिल किया गया है। सीएमओ ने जांच टीम को सात दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच रिपोर्ट में अस्पताल या डॉक्टरों की लापरवाही साबित होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

