यूपी: बांदा जेलर विक्रम सिंह यादव सस्पेंड, नोएडा के माफिया रवि काना को रिहा करने पर गिरी गाज

बांदा जेल के कारापाल विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया गया है। नोएडा के बड़े स्क्रैप माफिया रवि काना को कोर्ट के वारंट के बावजूद जेल से रिहा करने का आरोप। पढ़ें पूरी खबर।

Partap Singh Nagar
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यूपी: बांदा जेलर विक्रम सिंह यादव सस्पेंड, नोएडा के माफिया रवि काना को रिहा करने पर गिरी गाज

बांदा/नोएडा/ भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बांदा जेल के कारापाल (जेलर) विक्रम सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। उन पर नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि नागर उर्फ रवि काना को नियमों के विरुद्ध जाकर रिहा करने का गंभीर आरोप है।

क्या है पूरा विवाद? (रिहाई बनाम वारंट)

इस पूरे मामले में समय (Timing) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

🔸जेल प्रशासन का दावा: बांदा जेल प्रशासन का कहना है कि रवि काना के खिलाफ अन्य सभी मामलों में रिहाई के आदेश मिल चुके थे। उन्होंने रवि को शाम 6:39 बजे रिहा कर दिया। प्रशासन के अनुसार, नोएडा कोर्ट का नया वारंट उन्हें रात 7:45 बजे (पौने 8 बजे) प्राप्त हुआ।

🔸कोर्ट का रुख: गौतमबुद्धनगर की कोर्ट का कहना है कि 29 जनवरी को दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिमांड की सुनवाई हुई थी। ऐसे में जेल प्रशासन को जानकारी थी कि आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लिया जा रहा है, फिर भी उसे रिहा करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?

कौन है रवि काना? (करोड़ों का साम्राज्य)

रवि नागर उर्फ रवि काना नोएडा और एनसीआर का एक बड़ा स्क्रैप माफिया माना जाता है।

🔸धौंस और उगाही: उस पर आरोप है कि वह गुंडई के दम पर नोएडा की बड़ी फैक्ट्रियों से करोड़ों रुपये का स्क्रैप कौड़ियों के भाव खरीदता था।

🔸 गैंगस्टर नेटवर्क: वह अपने गिरोह के जरिए अवैध व्यापार और फैक्ट्रियों से जबरन वसूली का नेटवर्क चलाता था। हाल ही में नोएडा पुलिस ने उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी करोड़ों की संपत्तियां भी जब्त की थीं।

कारापाल पर गिरी गाज

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) गौतमबुद्धनगर की फटकार के बाद शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई। जेलर विक्रम सिंह यादव पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट के बी-वारंट (B-Warrant) की स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही माफिया को जेल से बाहर जाने दिया। इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा और आरोपी को भागने में मदद करने के तौर पर देखा जा रहा है।

कोर्ट ने पूछा- क्या यह कस्टडी से भगाना है?

कोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए पूछा है कि इस लापरवाही के लिए उन पर “कस्टडी से भागने में मदद करने” का मुकदमा क्यों न चलाया जाए। अब बांदा जेल प्रशासन को 06 फरवरी 2026 तक कोर्ट में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करना है।

 

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