बरेली/लखनऊ/भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में सोमवार को उस समय भूचाल आ गया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (2019 बैच के पीसीएस अधिकारी) ने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र भेज दिया। गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामयी अवसर पर दिए गए इस इस्तीफे ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शंकराचार्य का अपमान और ब्राह्मण अस्मिता का हवाला
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने 7 पन्नों के विस्तृत इस्तीफे में प्रयागराज माघ मेले की एक घटना का जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। अग्निहोत्री ने लिखा कि ब्राह्मणों की शिखा (चोटी) पकड़कर उन्हें घसीटा गया, जो उनके धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव पर चोट है। उन्होंने वर्तमान सरकार को ‘ब्राह्मण विरोधी’ विचारधारा वाली सरकार करार दिया।

‘भ्रमतंत्र’ और ‘विदेशी जनता पार्टी’ जैसे कड़े शब्द
अपने इस्तीफे में अधिकारी ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि देश में अब जनतंत्र नहीं बल्कि ‘भ्रमतंत्र’ चल रहा है। साथ ही भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे ‘विदेशी जनता पार्टी’ की सरकार बताया। इसके अलावा उन्होंने यूजीसी (UGC) के नए कानून को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
डीएम आवास पर ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’
इस्तीफा देने के बाद सोमवार शाम को जब अलंकार अग्निहोत्री डीएम आवास पहुंचे, तो वहां स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। बाहर निकलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें डीएम आवास पर 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम अविनाश सिंह किसी लखनऊ के अधिकारी से स्पीकर पर बात कर रहे थे, जहाँ से उन्हें अपशब्द कहे गए।

सरकार का एक्शन और विपक्ष का हमला
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यूपी सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है और उन्हें शामली जिले से अटैच किया गया है। मामले की जांच बरेली के मंडलायुक्त को सौंपी गई है।
इस मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने सरकार पर शंकराचार्य को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने इसे ‘राजनीति की बू’ बताते हुए अधिकारी के दावों को खारिज कर दिया।

