Lucknow/ भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड के संबंध में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया है। प्रदेश के नियोजन विभाग ने समस्त सरकारी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth- DOB) के प्रामाणिक दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसे केवल एक पहचान पत्र के रूप में ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।
यह बड़ा फैसला राज्य सरकार ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त एक पत्र के आधार पर लिया है।
UIDAI ने दी थी स्पष्टीकरण
नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल द्वारा 24 नवंबर 2025 को जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड जन्मतिथि का ‘अनुमन्य प्रमाण’ नहीं है। UIDAI ने अपने पत्र में यह साफ किया था कि आधार पंजीकरण की प्रक्रिया में व्यक्ति की जन्मतिथि किसी मान्य और प्रमाणित दस्तावेज से सत्यापित करना हमेशा अनिवार्य नहीं होता है। कई मामलों में जन्मतिथि आवेदक द्वारा ‘स्वयं घोषित’ (Self-Declared) होती है।
चूँकि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को प्रमाणित (Verified) नहीं माना जा सकता, इसलिए इसे किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया में DOB के प्रमाण के तौर पर उपयोग करना उचित नहीं है।

इन प्रक्रियाओं पर पड़ेगा सीधा असर
उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्देश का सीधा असर विभिन्न सरकारी सेवाओं और औपचारिकताओं पर पड़ेगा। अब सभी विभागों को जन्मतिथि साबित करने के लिए अन्य प्रमाणित दस्तावेज मांगने होंगे। यह निर्देश विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है:
🔸 सरकारी नियुक्तियाँ और भर्तियाँ
🔸सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि दर्ज करना
🔸पेंशन निर्धारण और प्रमोशन
🔸 छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ
🔸 विभिन्न लाइसेंस और दस्तावेज़ निर्माण
अब जन्मतिथि के लिए मान्य होंगे ये विकल्प
आधार कार्ड के अमान्य होने के बाद, राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे जन्मतिथि के लिए नियमों के तहत पहले से अधिकृत अन्य प्रमाणित दस्तावेजों को ही स्वीकार करें। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
🔸जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
🔸हाईस्कूल या समकक्ष परीक्षा का प्रमाण पत्र/मार्कशीट
🔸नगर निकाय या ग्राम पंचायत द्वारा जारी आधिकारिक जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड
🔸पासपोर्ट (जिसमें जन्मतिथि दर्ज हो)
🔸अन्य कोई दस्तावेज जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा जन्मतिथि प्रमाण के लिए अधिकृत हो।
सरकार ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों, अपर मुख्य सचिवों और अन्य अधीनस्थ कार्यालयों को तत्काल प्रभाव से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता और सख्त व्यवस्था लागू की जा सके।

