Greater Noida News /भारतीय टॉक न्यूज़: ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ चालानों में हेराफेरी करके प्राधिकरण को लगभग 55 लाख रुपये का भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया है। यह घोटाला 2005 से 2011 के बीच अंजाम दिया गया था। प्राधिकरण की आंतरिक जांच में मामला सामने आने के बाद अब धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
प्राधिकरण की आंतरिक जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई सालों तक चालानों के साथ छेड़छाड़ की जा रही थी। जब इस हेराफेरी का खुलासा हुआ, तो पूरे घोटाले की परतें खुलने लगीं। जांच में पाया गया कि इस संगठित तरीके से किए गए फर्जीवाड़े से प्राधिकरण के खजाने को करीब 55 लाख रुपये का चूना लगाया गया।
इन लोगों के खिलाफ हुई FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सहायक महाप्रबंधक (उद्योग) सिद्धार्थ गौतम ने सूरजपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। यह मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज़ का असली के रूप में उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस ने निम्नलिखित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है:
पंकज सिंघल (दिल्ली)
सैयद हुसैन ताहिर
सैयद आबिद ताहिर
सतीश सिंघल
इरफान अहमद
अरशद इमाम
प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घोटाले ने एक बार फिर विकास प्राधिकरणों की आंतरिक निगरानी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? इस घटना ने यह चिंता भी बढ़ा दी है कि क्या प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी भी इस धांधली में शामिल थे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता के पैसे को लूटने वाले इन आरोपियों के साथ-साथ पर्दे के पीछे के जिम्मेदार लोगों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।

