चिल्ला एलिवेटेड प्रोजेक्ट: घटिया स्टील के उपयोग पर निर्माण कंपनी पर ₹10 करोड़ का ऐतिहासिक जुर्माना

Chilla Elevated Project: Historic ₹10 crore fine imposed on construction company for using substandard steel

Partap Singh Nagar
3 Min Read
चिल्ला एलिवेटेड प्रोजेक्ट: घटिया स्टील के उपयोग पर निर्माण कंपनी पर ₹10 करोड़ का ऐतिहासिक जुर्माना

Noida /भारतीय टॉक न्यूज़: नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) ने सरकारी महत्व के ‘चिल्ला एलिवेटेड रोड’ परियोजना में निम्न गुणवत्ता वाले स्टील का उपयोग करने के आरोप में निर्माण एजेंसी पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया है। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने निर्माण मानकों का उल्लंघन और बार-बार निर्देशों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई करते हुए कंपनी पर ₹10 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है।

यह कड़ी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यह प्रतिष्ठित परियोजना दिल्ली के मयूर विहार फ्लाईओवर को नोएडा के महामाया फ्लाईओवर से जोड़कर लाखों यात्रियों को राहत देने वाली है।

 मानकों की अनदेखी और कड़ी कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक, चिल्ला एलिवेटेड रोड के निर्माण में लगी एजेंसी टेंडर की शर्तों का उल्लंघन कर रही थी। टेंडर में तीन विशिष्ट कंपनियों के स्टील का उपयोग निर्धारित किया गया था, लेकिन निरीक्षण के दौरान पाया गया कि एजेंसी एक अन्य कंपनी का स्टील इस्तेमाल कर रही थी, जिसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप बहुत अच्छी नहीं थी।

पूर्व में निर्देश दिए जाने के बावजूद, एजेंसी द्वारा नियमों का पालन नहीं किया गया। इस घोर लापरवाही को देखते हुए, सीईओ लोकेश एम ने तत्काल प्रभाव से ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माने की राशि निर्माण एजेंसी को किए जाने वाले आगामी भुगतान में से काट ली जाएगी।

> विशेष निर्देश: प्राधिकरण ने एजेंसी को तत्काल प्रभाव से निर्धारित कंपनियों के अतिरिक्त किसी भी अन्य कंपनी के स्टील का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया है।

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 परियोजना से लाखों लोगों को मिलेगी राहत

लगभग 6 किलोमीटर लंबी चिल्ला एलिवेटेड परियोजना का उद्देश्य दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रा करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना है। इस परियोजना पर लगभग ₹900 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

यह परियोजना पिछले कई महीनों से चल रही है, और अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। गुणवत्ता नियंत्रण पर प्राधिकरण की यह सख्ती यह सुनिश्चित करेगी कि सार्वजनिक महत्व की यह परियोजना न केवल समय पर पूरी हो, बल्कि उच्चतम सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को भी पूरा करे।

 

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