शोक: ‘लाइब्रेरी मैन’ रामवीर तंवर का हृदयगति रुकने से निधन, देश भर में शोक की लहर।

Condolence: 'Library Man' Ramveer Tanwar dies of cardiac arrest, wave of mourning across the country.

Partap Singh Nagar
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शोक: 'लाइब्रेरी मैन' रामवीर तंवर का हृदयगति रुकने से निधन, देश भर में शोक की लहर।

Noida / भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित झुंडपुरा गांव से निकलकर पूरे देश के गांवों में शिक्षा की अलख जगाने वाले प्रख्यात समाजसेवी रामवीर तंवर का आज हृदयगति रुकने (Cardiac Arrest) से आकस्मिक निधन हो गया। उन्होंने नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही शिक्षा जगत, पर्यावरण प्रेमियों और उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

 शोक: 'लाइब्रेरी मैन' रामवीर तंवर का हृदयगति रुकने से निधन, देश भर में शोक की लहर।

इंजीनियरिंग छोड़ चुनी थी समाज सेवा की राह

पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर रहे रामवीर तंवर ने अपनी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) की आरामदायक नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी ताकि वे उन ग्रामीण बच्चों का भविष्य संवार सकें, जो संसाधनों के अभाव में भटक रहे थे। उन्होंने देखा कि उनके गांव और आसपास के युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं, जिसे रोकने के लिए उन्होंने ‘शिक्षा’ को हथियार बनाया।

‘मिशन ग्रामीण पुस्तकालय’ और 300 से अधिक लाइब्रेरी

रामवीर तंवर का सपना हर गांव में एक डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का था। उन्होंने इसकी शुरुआत 3 मार्च 2018 को अपने गांव झुंडपुरा के एक खंडहर पड़े पंचायत घर से की थी। मात्र 5 वर्षों के भीतर, उन्होंने समाज के सहयोग से 300 से अधिक ग्रामीण पुस्तकालयों की स्थापना की। उनके इस ‘मिशन ग्रामीण पुस्तकालय’ (Gram Pathshala) ने झुग्गी-झोपड़ियों और सुदूर गांवों के हजारों बच्चों को किताबों से जोड़ा।

रविवार: जो समाज के लिए समर्पित था

रामवीर अक्सर कहा करते थे, “पूरे हफ्ते काम के बाद बस एक संडे ही बचता है भाई, और वो समाज के लिए है।” उनके करीबियों ने बताया कि किसी भी छुट्टी या रविवार के दिन वे आराम करने के बजाय अपनी गाड़ी में किताबें लादकर किसी गांव की ओर निकल जाते थे, ताकि वहां लाइब्रेरी की नींव रखी जा सके। विडंबना देखिए कि आज रविवार के दिन ही, समाज की सेवा करते हुए उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

समाज के लिए अपूरणीय क्षति

उनका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि उस सोच का जाना है जिसने ‘हर घर लाइब्रेरी’ का सपना देखा था। ग्रामीण परिवेश के बच्चों के लिए वे एक ऐसे सेतु थे, जो उन्हें अंधेरे से उजाले की ओर ले जा रहे थे।

ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस वज्रपात को सहने की शक्ति दें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि!

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