Ganesh Chaturthi 2025: आज घर-घर विराजेंगे गणपति, जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और महत्व 

Ganesh Chaturthi 2025: Today Ganpati will be seated in every house, know the auspicious time of idol installation, complete worship method and importance

Partap Singh Nagar
4 Min Read
Ganesh Chaturthi 2025: आज घर-घर विराजेंगे गणपति, जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और महत्व 

Ganesh Chaturthi 2025/ भारतीय टॉक न्यूज़: आज, 27 अगस्त 2025, से दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ हो गया है।

यह महापर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर भक्त अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि, सुख और समृद्धि का देवता माना जाता है  आइए जानते हैं गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और इस पर्व का महत्व

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:53 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त को दोपहर 3:43 बजे तक रहेगी।उदया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जा रहा है । भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए इसी समय में उनकी स्थापना करना सबसे उत्तम माना जाता है

 Ganesh Chaturthi 2025: आज घर-घर विराजेंगे गणपति, जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और महत्व 

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक

पूजा मुहूर्त की कुल अवधि: 2 घंटे 34 मिनट

गणपति स्थापना और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है:

स्थान की सफाई: सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ-सुथरा कर लें. आप इसे फूलों और रंगोली से भी सजा सकते हैं

चौकी की स्थापना: पूजा स्थान पर, विशेषकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में, एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं

मूर्ति स्थापना: बाजार से लाई गई गणपति की मूर्ति को इस चौकी पर सम्मानपूर्वक स्थापित करें. मूर्ति को घर लाने से पहले नारियल फोड़कर उनका स्वागत करना शुभ माना जाता है

पूजा का संकल्प: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत और पूजा का संकल्प करें

आह्वान और स्नान: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश का आह्वान करें. इसके बाद मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं

वस्त्र और श्रृंगार: स्नान के बाद गणपति को नए वस्त्र, आभूषण और जनेऊ अर्पित करें

भोग और प्रसाद: भगवान गणेश को उनके प्रिय भोग मोदक और लड्डू चढ़ाएं. इसके साथ ही उन्हें दूर्वा घास, सिंदूर और लाल फूल भी अर्पित करें . अपनी उम्र के बराबर लड्डुओं का भोग लगाना शुभ माना जाता है, यदि संभव न हो तो 11 लड्डू भी चढ़ा सकते हैं

आरती और मंत्र जाप: घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें और अपनी श्रद्धानुसार उनके मंत्रों का जाप करें

गणेश चतुर्थी का महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है, क्योंकि उन्हें प्रथम पूज्य देवता का वरदान प्राप्त है . उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं और संकटों को दूर करने वाले

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था . इसी दिन को उनके जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी के तौर पर धूमधाम से मनाया जाता है. यह मान्यता है कि इन दस दिनों में भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और विवेक की प्राप्ति होती है और भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं .

 

 

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