Greater Noida / Dadri / भारतीय टॉक न्यूज़: थाना जारचा क्षेत्र के प्यावली गांव में एक निजी अस्पताल की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा के लाइसेंस पर एलोपैथिक उपचार किया जा रहा था। आरोप है कि अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगने से 15 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है। विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
हापुड़ के नंगला गांव निवासी पुष्पेंद्र सिंह के 15 वर्षीय बेटे रजत भाटी को तेज बुखार की शिकायत के बाद शनिवार को प्यावली स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। रजत बंबावड़ गांव के एक स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने रजत को एक इंजेक्शन लगाया, जिसके तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
हालत गंभीर होने पर परिजन उसे गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद, परिवारजन किशोर के शव के साथ दादरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई
मामले की शिकायत गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को मिली, जिसके बाद एक जांच टीम का गठन किया गया। सीएमओ ने बताया कि मृतक किशोर के चाचा नरेंद्र कुमार ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। नोडल अधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया तो वहां गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में पता चला कि अस्पताल के पास केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का लाइसेंस था, लेकिन वह एलोपैथिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहा था। टीम को मौके से एलोपैथिक दवाएं, एक्स-रे मशीन और हड्डियां जोड़ने वाले उपकरण भी मिले। इन निष्कर्षों के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने बृहस्पतिवार को तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया।
तीन दिन में देना होगा जवाब
दादरी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को एक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उन्हें तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जारचा कोतवाली प्रभारी सुमनेश कुमार ने भी कहा है कि लिखित शिकायत के आधार पर मामले की गहनता से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

