ग्रेटर नोएडा: हक़ की लड़ाई में किसान, बोले- 4% आबादी भूखंड सभी को मिले, भेदभाव बर्दाश्त नहीं

Greater Noida: Farmers fight for their rights, say everyone should get 4% population plots, discrimination will not be tolerated

Bharatiya Talk
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ग्रेटर नोएडा: हक़ की लड़ाई में किसान, बोले- 4% आबादी भूखंड सभी को मिले, भेदभाव बर्दाश्त नहीं

Greater Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़ संवाददाता: ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन देने वाले सैकड़ों गांवों के किसान एक बार फिर अपने हक़ की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उनकी एक सूत्रीय मांग है कि सभी प्रभावित भूमिधर किसानों को 4% विकसित किसान आबादी भूखंड समान रूप से आवंटित किया जाए, चाहे उन्होंने मुआवज़े के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया हो या नहीं। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी इस न्यायोचित मांग को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।

एक आदेश, दो तरह का अमल: भेदभाव का आरोप

किसानों का गुस्सा और उनकी मांग दशकों पुराने भूमि अधिग्रहण और उसके बाद हुए मुआवज़ा वितरण में असमानता से उपजी है। मामला भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है, जिसमें अधिकतर किसानों ने 1997 करार नियमावली के तहत मुआवज़ा स्वीकार कर लिया था।

 ग्रेटर नोएडा: हक़ की लड़ाई में किसान, बोले- 4% आबादी भूखंड सभी को मिले, भेदभाव बर्दाश्त नहीं
ग्रेटर नोएडा: हक़ की लड़ाई में किसान, बोले- 4% आबादी भूखंड सभी को मिले, भेदभाव बर्दाश्त नहीं

विवाद का मुख्य बिंदु माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 21 अक्टूबर 2011 को पारित आदेश (रिट संख्या 37443/2011 – गजराज सिंह व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत, याचिकाकर्ता किसानों को 64.7% अतिरिक्त मुआवज़ा और विकसित भूखंड दिए जाने का आदेश हुआ। प्राधिकरण ने 64.7% अतिरिक्त मुआवज़े का लाभ तो सभी प्रभावित किसानों को दिया, चाहे वे मामले में पक्षकार थे या नहीं। लेकिन जब विकसित भूखंड देने की बारी आई, तो यह लाभ सिर्फ याचिकाकर्ता किसानों तक ही सीमित रखा गया।

पीड़ित किसानों का कहना है कि यह प्राधिकरण द्वारा किया गया खुला भेदभाव और धोखाधड़ी है। जब एक ही आदेश के एक हिस्से (अतिरिक्त मुआवजा) को सभी के लिए लागू किया गया, तो दूसरे हिस्से (विकसित भूखंड) से उन किसानों को वंचित क्यों किया जा रहा है, जिन्होंने कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी?

चेयरमैन का वादा अधूरा, किसान महसूस कर रहे ठगा हुआ

किसानों ने याद दिलाया कि तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन श्री रमा रमन ने गाँवों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सार्वजनिक रूप से वादा किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जो किसान अदालत नहीं गए हैं, उन्हें भी वे सभी लाभ दिए जाएंगे जो याचिकाकर्ताओं को मिले हैं, जिसमें 64.7% मुआवज़ा और 10% आबादी भूखंड (जिसका 4% हिस्सा विकसित करके दिया जाना है) शामिल था। लेकिन यह वादा आज तक कागजों और बातों से बाहर नहीं निकल पाया है, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

सरकार से न्याय की अपील

“शेष 10% प्लॉट पीड़ित किसान” नामक समूह के बैनर तले एकजुट हुए किसानों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की करबद्ध अपील की है। उनका कहना है कि सरकार को प्राधिकरण को यह स्पष्ट निर्देश देना चाहिए कि बिना किसी भेदभाव के सभी प्रभावित किसानों को 4% विकसित आबादी भूखंड शीघ्र आवंटित किया जाए।

किसानों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल ज़मीन के एक टुकड़े का सवाल नहीं, बल्कि उनके न्याय, समानता और आत्मसम्मान का प्रश्न है। उन्होंने कहा, “हमने विकास के लिए अपनी पुरखों की ज़मीन दी, लेकिन बदले में हमें छला गया। एक ही ज़मीन के लिए दो अलग-अलग नीतियां अपनाना अन्याय है।”

यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो किसानों ने धरना प्रदर्शन, शांतिपूर्ण आंदोलन और आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक विकल्पों का रास्ता अपनाने की भी तैयारी कर ली है, ताकि बराबरी का हक़ सुनिश्चित हो सके।

 

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