Greater Noida / भारतीय टॉक न्यूज़: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GRENO Authority) को बुधवार को अच्छेजा गांव में दूसरी बार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में विफलता का सामना करना पड़ा। लगभग आठ माह पहले 4 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को मुक्त कराने के बाद, प्राधिकरण की टीम दोबारा अतिक्रमण हटाने पहुंची, लेकिन रामायणम’ विला के बिल्डर भूमाफियाओं के द्वारा बलाई गए स्थानीय ग्रामीणों और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तीव्र विरोध के चलते उन्हें बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा।
हालांकि, प्राधिकरण के सूत्रों और पिछली कार्रवाई के विवरण से पता चलता है कि यह विरोध अवैध रूप से दोबारा कब्जा करने वाले भू-माफियाओं द्वारा किसान संगठन की आड़ में अपनी संपत्तियों को बचाने का एक प्रयास हो सकता है।
अप्रैल 2025 में 4 करोड़ की जमीन हुई थी मुक्त
प्राधिकरण द्वारा जारी 3 अप्रैल 2025 के प्रेस नोट के अनुसार, प्राधिकरण की टीम ने एसीईओ प्रेणा सिंह के निर्देश पर अच्छेजा गांव के खसरा संख्या 1420 और 1421 की लगभग 4000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया था। यह जमीन ‘रामायणम’ के नाम से अवैध कॉलोनी बनाकर बेची जा रही थी।


🔸 पिछली कार्रवाई: इस कार्रवाई में 06 जेसीबी और 2 डंपर की मदद से तीन घंटे में लगभग 4 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था।
🔸 लक्ष्य भू-माफिया: प्राधिकरण ने साफ किया था कि यह कार्रवाई उन कॉलोनाइजरों के खिलाफ थी जो चोरी-छिपे निर्माण करने की कोशिश कर रहे थे, और लोगों को चेतावनी दी थी कि वे अवैध कॉलोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई न फंसाएं।
माना जा रहा है कि जिन अवैध निर्माणों को अप्रैल में ध्वस्त किया गया था, उन पर दोबारा अतिक्रमण हो गया था, जिसे हटाने के लिए प्राधिकरण की टीम बुधवार को फिर पहुंची थी।
आज की कार्रवाई और विरोध
बुधवार को, प्राधिकरण की टीम पुलिस बल के साथ आठ जेसीबी मशीनें लेकर दोबारा अच्छेजा रामायणम’ विला पहुंची। उनका निशाना वही खसरा संख्या 1420 और 1421 पर हुए नए या दोबारा किए गए अवैध निर्माण थे।
मौके पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों के साथ भू-माफिया के सहयोगी और ग्रामीण कार्रवाई का तीव्र विरोध किया। यूनियन के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि प्राधिकरण बिना सहमति बनाए कार्रवाई कर रहा है, और जिन निर्माणों को तोड़ा जाना है, वहां लोग करीब 15 साल से रह रहे हैं।
विरोध के पीछे का सच
प्राधिकरण सूत्रों का कहना है कि यह पूरा विरोध, वास्तव में, उन भू-माफियाओं द्वारा प्रायोजित था जिन्होंने सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा किया या अप्रैल की कार्रवाई के बाद बचे हुए निर्माणों को ढाल बनाया।
भू-माफिया अब किसान संगठन की आड़ लेकर और 15 साल पुराने निवास का भावनात्मक मुद्दा उठाकर, अपनी अवैध संपत्तियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिस पर प्राधिकरण को पहले भी नोटिस जारी करना पड़ा था।
कोतवाली प्रभारी बादलपुर, अमित भड़ाना ने पुष्टि की कि ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम को बिना कार्रवाई किए ही लौटना पड़ा।
फिलहाल, प्राधिकरण इस बात पर विचार कर रहा है कि अब इन भू-माफियाओं के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक रूप से आगे क्या कदम उठाया जाए, ताकि करोड़ों की सरकारी जमीन को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त रखा जा सके।

