Greater Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़: ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में विवाहिता निक्की भाटी की जलाकर हत्या के मामले में आरोपी ससुर सतबीर की जमानत अर्जी सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इस चरण पर आरोपी को रिहा करना उचित नहीं होगा। अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि आरोपी के जेल से बाहर आने पर वह साक्षियों (गवाहों) को प्रभावित कर सकता है, जिससे मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होगी। सत्र न्यायाधीश ने मृतका की बहन कंचन भाटी द्वारा लगाए गए स्पष्ट आरोपों, विवेचना के दौरान दर्ज गवाहों के बयानों, चिकित्सीय रिपोर्ट और प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उसकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या थे आरोपी के खिलाफ आरोप और बचाव पक्ष की दलीलें?
मृतका की बहन कंचन भाटी ने 22 अगस्त 2025 को कासना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वर्ष 2016 में विपिन से शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष—सास दया, पति विपिन, देवर रोहित और ससुर सतबीर—दहेज के लिए निक्की को प्रताड़ित कर रहे थे। वादिया का आरोप है कि 21 अगस्त की शाम लगभग 5:30 बजे चारों आरोपियों ने मिलकर निक्की पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी, जिससे गंभीर रूप से झुलसी निक्की की बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। दूसरी ओर, आरोपी के अधिवक्ता मनोज माटी ने बचाव करते हुए कहा कि सतबीर घटना के समय घटनास्थल पर नहीं था, बल्कि अपनी किराने की दुकान पर था। उन्होंने दावा किया कि उसने न केवल मृतका को अस्पताल ले जाने में मदद की, बल्कि सीसीटीवी फुटेज में भी उसकी उपस्थिति दिखाई देती है। उन्होंने मृतका द्वारा अस्पताल में डॉक्टर और नर्स को दिए गए बयान का हवाला भी दिया, जिसमें उसने खुद को सिलेंडर फटने से जली बताया था, जिससे आरोपों को संदिग्ध माना गया।
अभियोजन और कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ब्रहमजीत सिंह और मृतका के परिजन के अधिवक्ता (दिनेश कल्सन, संतोष बंसल, उधम सिंह तोंगड़) ने बचाव पक्ष की दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि सत्वीर की दुकान घर के नीचे ही है, इसलिए उसका घटनास्थल पर न होना असंभव है। उन्होंने यह भी बताया कि मामला पारिवारिक रंजिश का है और आरोपी घटना में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। अदालत ने पाया कि आरोपी सत्वीर गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है और यदि उसे रिहा किया गया तो साक्षियों को प्रभावित करने की संभावना अत्यधिक है। पहले ही मृतका के देवर रोहित की जमानत खारिज हो चुकी है, जबकि सास और पति की जमानत अर्जी अभी नहीं लगाई गई है। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, सत्र न्यायाधीश ने जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार न पाते हुए ससुर सत्वीर की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

