Greater Noida /भारतीय टॉक न्यूज़: ग्रेटर नोएडा के एक कॉलेज में मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) के द्वितीय वर्ष के छात्र ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। झारखंड के रहने वाले इस छात्र ने आत्महत्या से पहले एक छोटा और मार्मिक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने लिखा, “मैं हार गया हूँ।”
घटनाक्रम: पिता की आखिरी चेतावनी
यह दुखद घटना ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के तुगलपुर स्थित क्राउन हॉस्टल में शनिवार दोपहर को हुई। मृतक छात्र की पहचान कृष्णकांत (25) के रूप में हुई है, जो NIET कॉलेज में MCA सेकंड ईयर का छात्र था।
पुलिस के अनुसार, कृष्णकांत ने अपने कमरे (रूम नंबर 79, थर्ड फ्लोर) में छत के पंखे के हुक में अंगोछा डालकर फांसी लगा ली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आत्महत्या से कुछ देर पहले ही कृष्णकांत के पिता ने उसके रूममेट ऋतिक को फोन किया था।
पिता ने ऋतिक को जल्दी से कृष्णकांत के कमरे पर जाने के लिए कहा क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कृष्णकांत कुछ गलत करने वाला है। पिता की चेतावनी पर ऋतिक ने हॉस्टल के दोस्तों को कॉल किया। जब वे कृष्णकांत के कमरे पर पहुँचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने कुंडी तोड़कर दरवाजा खोला और देखा कि कृष्णकांत ने फांसी लगा ली है। अनहोनी होने तक बहुत देर हो चुकी थी।
मार्मिक सुसाइड नोट: “मैं हार गया हूँ”
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें छात्र ने अंग्रेजी में संक्षिप्त संदेश लिखा:
“मैं हार गया हूँ, अपना शरीर और अपनी चीजें अपने परिवार को देता हूँ, प्लीज परेशानी के लिए माफ करें।”
पुलिस ने छात्र के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है।
बीमारी और पढ़ाई का तनाव
हालांकि आत्महत्या की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन मृतक के दोस्त ऋतिक ने बताया कि कृष्णकांत के सिर में कोई बीमारी थी।
ऋतिक के अनुसार, “जब वह (कृष्णकांत) ज्यादा देर पढ़ाई करता था तो उसका सिर झुक जाता था, जिसकी वजह से वह काफी परेशान रहता था। हालांकि वह पढ़ाई में बहुत अच्छा था।”
पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य समस्या और पढ़ाई के तनाव के कारण छात्र ने यह भयानक कदम उठाया होगा। यह घटना उन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता को दर्शाती है जो पढ़ाई के दबाव में जी रहे हैं।

