दादरी/ग्रेटर नोएडा / भारतीय टॉक न्यूज़: ग्रेटर नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र स्थित कैमराला गांव में मामूली विवाद में हुई हरकेश भाटी की हत्या ने अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं पर आरोपियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है।
गाड़ी हटाने के विवाद में ली गई जान
जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना गाड़ी हटाने के एक मामूली विवाद से शुरू हुई थी। आरोप है कि इस तुच्छ बात पर आरोपियों ने हरकेश भाटी के साथ इतनी बेरहमी से मारपीट की कि उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रशांत उर्फ सीटू (निवासी कैमराला) समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
ग्रेटर नोएडा : हरकेश भाटी हत्याकांड में बड़ा खुलासा
🔸पीड़ित परिवार डर के साए में
🔸पीड़ित परिवार ने सपा नेता सुनील भाटी और उनके भाई दीपक भाटी पर आरोपियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।@Uppolice @noidapolice @CP_Noida @dgpup #GreaterNoida pic.twitter.com/GXnv4tOQNu— BT News |Bharatiya Talk| (@BharatiyaTalk) February 17, 2026
सपा नेताओं पर संरक्षण देने का आरोप
इस हत्याकांड में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार ने समाजवादी पार्टी के नेता व जिला पंचायत सदस्य सुनील भाटी और उनके भाई दीपक भाटी पर आरोपियों को शह देने के खुले आरोप लगाए। पीड़ित परिवार का कहना है कि राजनीतिक रसूख के चलते मामले की जांच को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच, जेल भेजे गए आरोपियों की एक तस्वीर सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने निष्पक्ष जांच की मांग को और हवा दे दी है।




बहन का वीडियो वायरल,
मृतक हरकेश की बहन ने एक वीडियो जारी कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। वीडियो में उन्होंने कुछ नए नामों का खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में कुछ रसूखदारों को बचाने का प्रयास कर रही है।
जांच के घेरे में राजनीतिक संबंध
भारतीय टॉक न्यूज़ इस मामले को लगातार प्रमुखता से उठा रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि 6 मुख्य आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल सपा नेताओं पर लगे आरोप और वायरल फोटो जांच के घेरे में हैं। संबंधित राजनीतिक पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

