ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : बिसरख क्षेत्र के नवजीवन अस्पताल में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त के सनसनीखेज खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है और अब इसे सील करने की तैयारी की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल की गड़बड़ियों की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया है।
रिकॉर्ड रूम के ताले तोड़कर खुलेगा राज
अस्पताल संचालिका यशिका गर्ग की गिरफ्तारी के बाद अस्पताल का अन्य स्टाफ रिकॉर्ड रूम में ताला लगाकर फरार हो गया था, जिससे बच्ची को जन्म देने वाली असल मां की पहचान नहीं हो पा रही है। अब डिप्टी सीएमओ डॉ. चंदन सोनी के अनुसार, डॉ. हरिओम के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी पुलिस की मौजूदगी में रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। डिलीवरी रजिस्टर में दर्ज महिलाओं के नाम और पते खंगाले जाएंगे ताकि यह पता चल सके कि नवजात को जन्म देने वाली महिला कौन है और क्या अस्पताल ने तथ्यों में कोई हेराफेरी की थी।
डॉक्टर हिरासत में, नर्स और अन्य आरोपी फरार
पुलिस ने घटना के बाद से लापता चल रहे एक डॉक्टर को हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ में अस्पताल की कई अनियमितताओं का पता चला है। वहीं, मामले में वांछित नर्स पुष्पा, उसके पति और अंजली नामक महिला (जिसे नवजात की मां बताया जा रहा है) की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। एसीपी सेंट्रल नोएडा पवन कुमार ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।
क्या था पूरा मामला?
बीते शनिवार को बिसरख पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नवजीवन अस्पताल में ₹2.60 लाख में नवजात के सौदे का पर्दाफाश किया था। इस मामले में पुलिस ने अस्पताल मालकिन यशिका गर्ग, टेक्नीशियन रंजीत और सफाईकर्मी गजेंद्र को पहले ही जेल भेज दिया है। पुलिस अब अस्पताल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ी जा सके।

