नोएडा प्राधिकरण: मुआवजा घोटाले की आंच तत्कालीन आला अधिकारियों तक पहुँचना तय; सुप्रीम कोर्ट में SIT रिपोर्ट से मची खलबली

नोएडा प्राधिकरण मुआवजा घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा। एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अफसरों ने लिया 10% कमीशन। पूर्व सीईओ भी जांच के दायरे में।

Partap Singh Nagar
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नोएडा प्राधिकरण: मुआवजा घोटाले की आंच तत्कालीन आला अधिकारियों तक पहुँचना तय; सुप्रीम कोर्ट में SIT रिपोर्ट से मची खलबली

नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़ : नोएडा प्राधिकरण में हुए करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले की जांच अब सीधे तौर पर तत्कालीन उच्चाधिकारियों तक पहुँचने वाली है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने प्राधिकरण के गलियारों में खलबली मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुआवजा बांटने में बरती गई अनियमितताओं के बदले अफसरों ने कथित तौर पर 10 प्रतिशत का मोटा कमीशन वसूला था। इस खुलासे के बाद तत्कालीन अफसरों की बेचैनी चरम पर है।

सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दिया 6 हफ्तों का समय

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने आगे की जांच पूरी करने के लिए अदालत से दो महीने की मोहलत मांगी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को त्वरित गति से निपटाने के निर्देश देते हुए मात्र 6 सप्ताह का समय दिया है। अब जांच का दायरा बढ़ना और कई तत्कालीन बड़े अधिकारियों का शिकंजे में आना तकरीबन तय माना जा रहा है। एसआईटी की टीम फाइलों को खंगालने के लिए जल्द ही एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर आ सकती है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है।

10-15 साल के कार्यकाल की होगी जांच: निशाने पर कई पूर्व CEO

यह पूरा मामला मुख्य रूप से गेझा तिलपताबाद, नंगला चरणदास और भूड़ा गांव की जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को पिछले 10 से 15 साल के दौरान नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO) की भूमिका की गहनता से जांच करने के आदेश पहले ही दे रखे हैं। पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ-साथ तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) और मुख्य विधि अधिकारी (CLA) भी इस रडार पर हैं। गौरतलब है कि कोर्ट इससे पहले दो बार हुई एसआईटी की जांच रिपोर्ट से असहमत जता चुका था, जिसके बाद यह तीसरी और बेहद सख्त जांच चल रही है।

2021 में खुला था फर्जीवाड़े का खेल

नोएडा के गांवों में मुआवजा बांटने में चल रही इस बड़ी धांधली का खुलासा साल 2021 में सबसे पहले गेझा तिलपताबाद गांव में हुआ था। दरअसल, माननीय न्यायालय ने एक पुराने मामले में किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसी आदेश की आड़ लेकर प्राधिकरण के शातिर अफसरों ने साल 2014-15 में अन्य कई अपात्र किसानों को भी बैक डेट और नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों का अनुचित लाभ पहुंचा दिया। वर्ष 2021 में जब इस बंदरबांट की परतें खुलीं, तो एक के बाद एक कई बड़े फर्जीवाड़े सामने आते चले गए।

 

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