बकाया वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण का शिकंजा, तीन बड़े बिल्डरों को 353 करोड़ रुपये का रिकवरी नोटिस

Noida Authority tightens its grip on recovery of dues, three big builders get recovery notice of Rs 353 crore

Bharatiya Talk
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बकाया वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण का शिकंजा, तीन बड़े बिल्डरों को 353 करोड़ रुपये का रिकवरी नोटिस

Noida News /भारतीय टॉक न्यूज़:  नोएडा प्राधिकरण ने शहर के तीन बड़े बिल्डर समूहों पर लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है। प्राधिकरण ने मैसर्स महागुन रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स प्रतीक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड से कुल ₹353.41 करोड़ की बकाया राशि की वसूली के लिए गौतम बुद्ध नगर के जिला अधिकारी (डीएम) को पत्र लिखकर इसे भू-राजस्व के रूप में वसूलने का आग्रह किया है। यह कदम प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम के निर्देश पर उठाया गया है, ताकि रुके हुए राजस्व को हासिल कर विकास कार्यों को गति दी जा सके।

प्राधिकरण द्वारा यह कठोर कार्रवाई कई नोटिसों और यहां तक कि राज्य सरकार की कोविड-19 राहत नीति के तहत दिए गए अवसरों के बावजूद बिल्डरों द्वारा भुगतान करने में विफल रहने के बाद की गई है। सीईओ डॉ. लोकेश एम के निर्देश पर 4 सितंबर, 2025 को डीएम को यह चिट्ठी भेजी गई, जिसमें इन बकाया राशियों को रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) के तौर पर वसूलने का अनुरोध किया गया है।

इन बिल्डरों पर है भारी बकाया:

प्राधिकरण ने अपने पत्र में तीन अलग-अलग मामलों का विस्तृत ब्यौरा दिया है:

मैसर्स महागुन रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड: पहला मामला सेक्टर-78 में स्थित एक भूखंड से संबंधित है, जिसका आवंटन मैसर्स महागुन रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड को अप्रैल 2010 में किया गया था। इस बिल्डर पर प्राधिकरण का ₹116.96 करोड़ का बकाया है। प्राधिकरण के अनुसार, बिल्डर को कई बार नोटिस भेजे गए और कोविड-19 राहत योजना का लाभ उठाने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उनकी तरफ से बकाया चुकाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।

मैसर्स प्रतीक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (सेक्टर-77): दूसरा मामला सेक्टर-77 के एक भूखंड का है, जो मार्च 2010 में मैसर्स प्रतीक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था। इस मामले में बिल्डर पर ₹162.27 करोड़ की भारी-भरकम राशि बकाया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बकाए के एवज में बिल्डर द्वारा कोई भी भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते प्राधिकरण को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

मैसर्स प्रतीक रियल्टर्स (सेक्टर-120): तीसरा मामला भी मैसर्स प्रतीक रियल्टर्स से ही जुड़ा है, जिन्हें दिसंबर 2009 में सेक्टर-120 में भूखंड आवंटित किया गया था। इस भूखंड पर कंपनी का ₹74.18 करोड़ बकाया है। इस मामले में भी बिल्डर ने न तो बकाया चुकाया और न ही कोविड-19 राहत योजना का लाभ उठाया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

नोएडा प्राधिकरण का यह कदम उन सभी डिफॉल्टर बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश है, जिन्होंने सालों से प्राधिकरण का पैसा रोक रखा है। भू-राजस्व के रूप में बकाया वसूली की प्रक्रिया में जिला प्रशासन को डिफॉल्टर की संपत्तियों को कुर्क करने और नीलाम करने का अधिकार होता है ताकि सरकारी खजाने की भरपाई की जा सके। उम्मीद है कि डीएम की इस कार्रवाई से न केवल प्राधिकरण को अपना रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा, बल्कि इससे वित्तीय अनुशासन को भी बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में अन्य बिल्डरों को समय पर भुगतान करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इस वसूली से प्राप्त धनराशि का उपयोग शहर के विकास कार्यों और अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने में किया जा सकेगा।

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