Noida /भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 219वीं बोर्ड बैठक में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे हजारों फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत दी गई, वहीं दूसरी ओर नियमों की अनदेखी करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। बैठक में शहर के ढांचागत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
फ्लैट खरीदारों के अच्छे दिन, 5,756 घरों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ
बैठक का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित फैसला रुकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं (लिगेसी स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स) को लेकर आया। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत 57 में से 35 परियोजनाओं के डेवलपर्स ने बकाया चुकाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे प्राधिकरण के खाते में 526.13 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इस कदम से सीधे तौर पर 5,756 फ्लैट खरीदारों के लिए रजिस्ट्री का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिनमें से 3,724 रजिस्ट्रियां सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं।
हालांकि, प्राधिकरण ने उन 22 परियोजनाओं के डेवलपर्स पर सख्ती दिखाई है जिन्होंने नीति का लाभ उठाने में आनाकानी की है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इन डेवलपर्स को अब कोई और मौका या छूट नहीं दी जाएगी और बकाया वसूली के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला घर खरीदारों के हितों को सर्वोपरि रखने की प्राधिकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता: ‘प्रहरी’ और ‘चाणक्य’ सॉफ्टवेयर से होगी निगरानी
प्राधिकरण ने अपनी निविदा प्रक्रियाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए ‘प्रहरी सॉफ्टवेयर’ के साथ ‘प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग’, ‘कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट’ और ‘चाणक्य सॉफ्टवेयर’ को एकीकृत करने की मंजूरी दी गई है। इस नई प्रणाली से किसी भी परियोजना के शुरू होने से लेकर उसके भुगतान तक की हर गतिविधि ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक निगरानी भी संभव होगी।
जमीन की जमाखोरी पर रोक: निर्माण न करने पर ग्रुप हाउसिंग प्लॉट होंगे रद्द
शहर के संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने एक कड़ा फैसला लिया है। जिन ग्रुप हाउसिंग भूखंडों पर आवंटन के 12 साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, उनके आवंटन को रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, जिन प्लॉट्स पर निर्माण कार्य चल रहा है या पूरा हो चुका है, उन्हें औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए 6 महीने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। इस कदम से नोएडा में बेकार पड़ी कीमती जमीनों पर निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता
🔸300 टन क्षमता का वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट: नोएडा को स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने के लिए 300 टन प्रति दिन (टीपीडी) की क्षमता वाले एक इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह प्लांट शहर के सेक्टरों और गांवों से निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करेगा।
🔸STP की मजबूती पर 87.6 करोड़ खर्च: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानकों का पालन करते हुए शहर के चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को अपग्रेड किया जाएगा। सेक्टर-50, 54, 123 और 168 में स्थित इन प्लांट्स की रेट्रोफिटिंग पर 87.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे उनकी जल शोधन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होगा।
इन मुख्य फैसलों के अलावा, बोर्ड ने सेक्टर-13 में एक पुलिस थाने के लिए भूमि आवंटन की पुनः पुष्टि की और संस्थागत प्लॉट्स के लिए एक नई एकीकृत नियमावली को भी मंजूरी दी। कुल मिलाकर, यह बैठक नोएडा के भविष्य के लिए एक स्पष्ट और प्रगतिशील रोडमैप तैयार करती है।

