Noida/ Jewar / भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले के जेवर में एक जमीन खरीद-फरोख्त मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो स्थानीय भाजपा नेताओं और एक महिला समेत कुल सात लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनकी और अन्य हिस्सेदारों की जमीन हड़पने की नीयत से अवैध रूप से बैनामा (रजिस्ट्री) करा लिया।
कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पूरा विवाद जेवर बांगर स्थित करोड़ों की कीमती जमीन से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
जेवर निवासी वीरपाल सैनी ने इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि वह जेवर बांगर स्थित भूमि गाटा संख्या 1506 (रकबा 1.78600) और भूमि गाटा संख्या 1507 (रकबा 0.0510 हेक्टेयर) के बतौर विरासत सह-हिस्सेदार, मालिक और काबिज हैं।
वीरपाल का आरोप है कि इस जमीन से नागलोई, दिल्ली की रहने वाली केला देवी पत्नी रतन लाल और उसके पुत्र बाबूलाल का कोई वास्ता नहीं है। इसके बावजूद, केला देवी ने 5 जुलाई को उक्त गाटा संख्याओं में से 499.49 वर्ग गज भूमि का बैनामा अवैध रूप से कर दिया।
इन लोगों पर लगा है आरोप
शिकायत के अनुसार, यह बैनामा जेवर के मोहल्ला घोड़ी वाला निवासी प्रदीप कुमार जैन, मोहल्ला कानूनगोयान निवासी लवकेश शर्मा, मोहल्ला बनी इसराइल निवासी रविन्द्र शर्मा (जिला संयोजक, भाजपा) और दयानतपुर निवासी प्रदीप सिंह (मंडल अध्यक्ष जेवर, भाजपा) के नाम किया गया।
आरोप है कि यह बैनामा शिकायतकर्ता वीरपाल सैनी और अन्य हिस्सेदारों की भूमि को हड़पने की नीयत से किया गया। इस अवैध बैनामे में केला देवी के पुत्र बाबू लाल और जेवर के मोहल्ला कानूनगोयान निवासी टिंकू को गवाह बनाया गया।
पुलिस ने शुरू की जांच
पीड़ित वीरपाल सैनी को इस बैनामे की जानकारी 1 सितंबर को खरीदारों (क्रेतागणों) से मिली। इसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि न्यायालय के आदेश पर सभी सात आरोपियों— जमीन विक्रेता केला देवी, क्रेतागण प्रदीप कुमार जैन, लवकेश शर्मा, रविन्द्र कुमार शर्मा, प्रदीप सिंह, और गवाह बाबूलाल व टिंकू— के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र व धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि इस विवाद में यह पहली एफआईआर नहीं है। इससे पूर्व, सोमवार को दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने 20 नामजद समेत 30 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। यह मामला एक जटिल भूमि विवाद की ओर इशारा कर रहा है, जिसमें अब राजनीतिक नाम भी सामने आ गए हैं।

