नोएडा: थाने में महिला वकील से यौन उत्पीड़न का आरोप, 14 घंटे बंधक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UP सरकार से मांगा जवाब, CCTV फुटेज सील करने का आदेश

Noida: Female lawyer sexually assaulted at police station, held hostage for 14 hours; Supreme Court seeks response from Centre and UP governments, orders sealing of CCTV footage

Partap Singh Nagar
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नोएडा: थाने में महिला वकील से यौन उत्पीड़न का आरोप, 14 घंटे बंधक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UP सरकार से मांगा जवाब, CCTV फुटेज सील करने का आदेश

 

Noida/भारतीय टॉक न्यूज़:  उच्चतम न्यायालय ने नोएडा के सेक्टर 126 थाने में एक महिला अधिवक्ता को 14 घंटे तक अवैध रूप से बंधक बनाने, यौन उत्पीड़न करने और यातना देने के आरोपों को “अत्यंत गंभीर” मानते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने इस मामले में पुलिस के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए हैं।

सीसीटीवी फुटेज को सील करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त (CP) को निर्देश दिया है कि 3 दिसंबर की घटना वाली अवधि के दौरान सेक्टर 126 थाने के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि फुटेज के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़, उसे डिलीट या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इसे तुरंत एक सीलबंद लिफाफे में रखकर सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है

याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

पीड़ित महिला वकील ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वह अपने एक मुवक्किल के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने के पेशेवर कर्तव्य का पालन करने थाने गई थीं। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें निशाना बनाया। याचिका के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उनकी गर्दन पर सरकारी पिस्टल रखकर उन्हें अपने मोबाइल का पासवर्ड बताने के लिए मजबूर किया और उन्हें फर्जी मुठभेड़ में मार देने की धमकी भी दी। वकील का आरोप है कि इस दौरान थाने के सीसीटीवी कैमरों को जानबूझकर बंद कर दिया गया था, जो सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता महिला वकील के अनुसार, 3 दिसंबर की रात वह अपने एक घायल मुवक्किल के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के सिलसिले में थाने गई थीं। आरोप है कि वहाँ पुलिसकर्मियों ने उन्हें 14 घंटे तक बंधक बनाकर रखा।

🔸गंभीर आरोप: याचिका में दावा किया गया है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी गर्दन पर पिस्टल रखकर उन्हें मोबाइल फोन का पासवर्ड देने के लिए मजबूर किया।

🔸यौन उत्पीड़न और यातना: हिरासत के दौरान उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया, मारपीट की गई और फर्जी एनकाउंटर में मारने की धमकी दी गई।

🔸नियमों का उल्लंघन: आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर थाने के सीसीटीवी कैमरों को ब्लॉक कर दिया ताकि सबूत न बन सकें।

“अगर नोएडा में यह हो रहा, तो देश की कल्पना कीजिए”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ से कहा, “यह दिल्ली के बिल्कुल करीब नोएडा में हो रहा है। यदि एक अधिवक्ता के साथ ऐसा हो सकता है, तो पूरे देश की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।” शुरुआत में पीठ ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया था, लेकिन मामले की गंभीरता और सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ के आरोपों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत इस पर खुद सुनवाई करने का फैसला किया। जस्टिस नाथ ने महिला की सुरक्षा पर आश्वस्त करते हुए कहा, “इस आदेश के बाद वे (पुलिस) उसे छूने की हिम्मत नहीं करेंगे।”

अगली सुनवाई 7 जनवरी को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एक ‘टेस्ट केस’ के रूप में स्वीकार किया है ताकि देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी की अनिवार्यता और पुलिस आचरण पर कड़ा संदेश दिया जा सके। केंद्र, यूपी सरकार और नोएडा पुलिस को 7 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच सीबीआई (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग की है।

 

 

 

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