Noida/भारतीय टॉक न्यूज़ (संवाददाता): उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो झूठी शिकायतों के आधार पर बिल्डरों, उद्यमियों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ खबरें छापकर उन्हें ब्लैकमेल करता था। एसटीएफ ने इस गैंग के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो एक बिल्डर से 15 करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहे थे।
ऐसे करते थे ब्लैकमेल
एसटीएफ (नोएडा यूनिट) के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो उद्योगपतियों और बिल्डरों के खिलाफ विभिन्न सरकारी विभागों जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जीएसटी, जीडीए, सीबीआई, और आयकर विभाग में फर्जी शिकायतें करता है।
जांच में सामने आया कि ये गिरोह पहले किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को अपना निशाना बनाता, उसके खिलाफ झूठे आरोपों की शिकायत तैयार करता और उसे संबंधित विभाग में भेज देता। इसके बाद, अपने सिंडिकेट में शामिल छोटे समाचार पत्रों और फ्रीलांस पत्रकारों की मदद से उसी शिकायत को आधार बनाकर खबरें प्रकाशित करवाते थे। खबर छपने के बाद ये लोग पीड़ित से संपर्क करते और मामला रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम की मांग करते थे।
15 करोड़ की रंगदारी का मामला
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने हाल ही में एक बिल्डर के खिलाफ इसी तरह की साजिश रची थी। उन्होंने बिल्डर के खिलाफ शिकायत कर खबर छपवाई और फिर उससे संपर्क कर 15 करोड़ रुपये की मांग की। जब बिल्डर ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो सौदा 5 करोड़ रुपये में तय हुआ, जिसमें से कुछ रकम वे वसूल भी चुके थे।
गिरफ्तार अभियुक्त
एसटीएफ ने मंगलवार दोपहर को सूरजपुर स्थित अपने कार्यालय से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान इस प्रकार है:
🔸 अंकुर गुप्ता: दरियागंज, दिल्ली का निवासी। यह गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
🔸 नरेंद्र धवन: सराय रोहिल्ला, दिल्ली का निवासी। यह एक समाचार पत्र का संचालक है।
🔸हरनाम धवन: सराय रोहिल्ला, दिल्ली का निवासी और नरेंद्र धवन का पुत्र।
इनके पास से 4 मोबाइल फोन, 66,720 रुपये नकद, एक अमेरिकी डॉलर, एक फर्जी आधार कार्ड और 17 डाक रसीदें बरामद हुई हैं।
कपड़े की दुकान से बना ब्लैकमेलर
एसटीएफ के अनुसार, मुख्य आरोपी 52 वर्षीय अंकुर गुप्ता 12वीं पास है और पहले दरियागंज में कपड़े की दुकान चलाता था। दुकान के लिए लिया गया लोन न चुका पाने पर जब बैंक ने कार्रवाई की तो उसने विभिन्न विभागों में शिकायतें करना शुरू कर दिया। यहीं से उसे यह समझ आया कि झूठी शिकायतें करके किसी को भी परेशान किया जा सकता है और उससे पैसे ऐंठे जा सकते हैं। अपनी इसी सोच के साथ उसने दिल्ली-एनसीआर के बिल्डरों और उद्यमियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया और अपने इस अवैध काम को बढ़ाने के लिए कुछ पत्रकारों को भी लालच देकर अपने साथ मिला लिया।

