नोएडा मेट्रो कैलेंडर विवाद: IAS महेंद्र प्रसाद पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण से छुट्टी कर लखनऊ मुख्यालय अटैच

नोएडा मेट्रो (NMRC) कैलेंडर विवाद में IAS महेंद्र प्रसाद पर गिरी गाज। पहले NMRC से छुट्टी और अब नोएडा प्राधिकरण से हटाकर लखनऊ मुख्यालय अटैच किया गया। जानिए क्या है पूरा मामला।

Bharatiya Talk
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नोएडा मेट्रो कैलेंडर विवाद: IAS महेंद्र प्रसाद पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण से छुट्टी कर लखनऊ मुख्यालय अटैच

नोएडा/लखनऊ/ भारतीय टॉक न्यूज़ : नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के साल 2026 के कैलेंडर को लेकर मचा बवाल शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। खुद की तस्वीरें कैलेंडर पर छपवाने के आरोपी 2014 बैच के IAS अधिकारी महेंद्र प्रसाद को उत्तर प्रदेश सरकार ने अब नोएडा प्राधिकरण से भी हटा दिया है। महेंद्र प्रसाद को लखनऊ मुख्यालय से अटैच (वेटिंग) कर दिया गया है, जिसे प्रशासनिक भाषा में ‘सजा’ के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद? (The Calendar Controversy)

विवाद की जड़ में NMRC का वह सरकारी कैलेंडर है, जिसमें प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के बजाय अधिकारियों की तस्वीरें प्रमुखता से छापी गई थीं।

🔸अप्रैल का पेज: इसमें MD लोकेश एम की दो तस्वीरें थीं (उनका जन्मदिन 3 अप्रैल को होता है)।

🔸जुलाई का पेज: इसमें ED महेंद्र प्रसाद की दो तस्वीरें थीं (उनका जन्मदिन 5 जुलाई को होता है)।

हैरानी की बात यह थी कि सरकारी खर्च पर छपे इस कैलेंडर में किसी भी जन-प्रतिनिधि की फोटो नहीं थी। इसे अधिकारियों का ‘व्यक्तिगत प्रचार’ माना गया, जिसके बाद शासन स्तर तक इसकी शिकायत पहुंची।

नोएडा मेट्रो कैलेंडर विवाद: IAS महेंद्र प्रसाद पर गिरी गाज, नोएडा प्राधिकरण से छुट्टी कर लखनऊ मुख्यालय अटैच

दोषी मानकर हुई कार्रवाई

विवाद बढ़ते देख MD लोकेश एम ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह उनकी अनुमति के बिना हुआ है। इसके बाद 9 जनवरी को महेंद्र प्रसाद को NMRC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से हटाकर उनकी जगह एसीईओ कृष्णा करुणेश को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका, अब शासन ने उन्हें नोएडा प्राधिकरण में OSD के पद से भी मुक्त कर लखनऊ भेज दिया है।

अधिकारियों में हड़कंप, जांच अभी जारी

महेंद्र प्रसाद लंबे समय से नोएडा में तैनात थे। सूत्रों की मानें तो यह कैलेंडर कई मंत्रालयों और विभागों में भी बंट गया था, जिससे सरकार की किरकिरी हुई। हालांकि, अभी तक MD लोकेश एम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच की आंच कुछ अन्य अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।

बड़ा सवाल: क्या सरकारी संस्थानों में अधिकारियों को खुद की ब्रांडिंग करने की अनुमति मिलनी चाहिए? इस घटना ने प्राधिकरण के कामकाज और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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