Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़: गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने ई-स्कूटी लीज स्कीम के नाम पर सैकड़ों लोगों को ठगने वाले एक बड़े फ्रॉड का पर्दाफाश किया है, जिसके तहत मुख्य अभियुक्त सौरभ मिश्रा को थाना फेस-2 पुलिस ने भंगेल से गिरफ्तार कर लिया है। सौरभ मिश्रा और उसके सहयोगी गौरव मिश्रा ने मिलकर एक सुनियोजित योजना बनाई थी, जिसके अंतर्गत उन्होंने भंगेल स्थित चैतन्य बिल्डिंग में एक आलीशान कार्यालय खोला। उनका मकसद दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के लोगों को आकर्षक निवेश योजना का झांसा देना था। वे प्रति ई-स्कूटी निवेश पर ₹85,000 की मोटी रकम जमा करवाते थे, जिसके बदले में तीन साल तक हर महीने ₹7,000 का निश्चित लाभांश देने का लालच देते थे। यह स्कीम इतनी आकर्षक थी कि लोग बिना सोचे-समझे निवेश कर रहे थे, लेकिन जल्द ही यह पता चला कि यह सब सिर्फ एक जाल था।
ठगी का मास्टरमाइंड, जेल से चला रहा था ऑपरेशन?
पुलिस जाँच में सामने आया है कि इस धोखाधड़ी का असली मास्टरमाइंड गौरव मिश्रा है, जिसने कंप्यूटर साइंस में बी.टेक. की पढ़ाई की है और साइबर क्राइम की दुनिया में उसका पुराना रिकॉर्ड है। गौरव मिश्रा साइबर ठगी के एक अन्य मामले में पहले ही गाजियाबाद की जेल में बंद है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा ऑपरेशन जेल से भी चलाया जा रहा हो सकता है। अभियुक्तों ने अपने ग्राहकों को विश्वास दिलाया कि उनके पैसे से ई-स्कूटी खरीदी जा चुकी है और कंपनी उसका संचालन कर रही है, लेकिन असलियत में वे निवेशकों की धनराशि को सीधे अपने बैंक खातों में जमा कर अवैध लाभ कमा रहे थे। जब लोगों को उनके मासिक मुनाफे की किस्तें मिलनी बंद हुईं और उन्होंने कार्यालय जाकर देखा, तो वह बंद मिला और आरोपी फरार हो चुके थे, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अन्य सहयोगियों की तलाश तेज
थाना फेस-2 पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस की मदद से त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 दिसंबर 2025 को शातिर ठग सौरभ मिश्रा को दबोच लिया। सौरभ मिश्रा, जो मात्र 10वीं पास है, अपने बी.टेक. शिक्षित साथी गौरव मिश्रा के साथ मिलकर यह हाई-प्रोफाइल फ्रॉड कर रहा था। पुलिस ने सौरभ मिश्रा के खिलाफ धारा 318(4)/316(2) बी.एन.एस के तहत दो मामले (मु0अ0सं0- 603/2025 और 604/2025) दर्ज किए हैं। साइबर ठगों के इस गिरोह ने एनसीआर के कई लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली है। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर का यह सराहनीय कार्य दर्शाता है कि वे संगठित आर्थिक अपराधों के प्रति गंभीर हैं और अब वे फरार चल रहे अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गए हैं ताकि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

