Noida / भारतीय टॉक न्यूज़: नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) डॉ. लोकेश एम ने जनहित के मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए एक अभूतपूर्व कार्रवाई की है। इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) के तहत आने वाली जन शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लगातार लापरवाही बरतने पर, CEO ने 8 वरिष्ठ अधिकारियों और विभागाध्यक्षों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
लापरवाह अधिकारियों पर गाज
यह कड़ा कदम उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ उठाया गया है जिनके विभागों में 12 से अधिक IGRS मामले लंबित हैं और बार-बार चेतावनी के बावजूद उनका निस्तारण नहीं किया गया। प्राधिकरण ने ऐसे विभागों को ‘डिफॉल्टर’ घोषित कर दिया है।
डॉ. लोकेश एम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जनता की शिकायतों के निपटारे में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “जनता की शिकायतें हमारी प्राथमिकता हैं। बार-बार याद दिलाने के बाद भी यदि अधिकारी जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगे तो ऐसे कड़े फैसले लिए जाते रहेंगे।”
वेतन रोकने की कार्रवाई की जद में आए अधिकारी:
वेतन रोकने की कार्रवाई जिन प्रमुख विभागों के अधिकारियों पर हुई है, वे इस प्रकार हैं:
| विभाग | अधिकारी का नाम और पद |
|---|---|
| ग्रुप हाउसिंग | श्री क्रांति शेखर सिंह, विशेष कार्याधिकारी |
| भूलेख | श्री अरविन्द कुमार सिंह, विशेष कार्याधिकारी |
| सिविल (महाप्रबंधक) | श्री ए.के. अरोड़ा |
| सिविल (महाप्रबंधक) | श्री एस.पी. सिंह |
| जल | श्री आर.पी. सिंह, महाप्रबंधक |
| नियोजन | श्रीमती मीना भार्गव, महाप्रबंधक |
| औद्योगिक | श्रीमती प्रिया सिंह, सहायक महाप्रबंधक |
| आवासीय भूखंड | श्री संजीव कुमार बेदी, सहायक महाप्रबंधक |
जवाबदेही और निस्तारण का लक्ष्य
नोएडा प्राधिकरण के इस सख्त रुख को समग्र रूप से जनता के बीच सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। निवासियों का कहना है कि ग्रुप हाउसिंग, भूलेख, जलापूर्ति और भूखंड आवंटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की शिकायतें लंबे समय से अनसुनी हो रही थीं, लेकिन CEO के इस कदम से अब अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायतों का निस्तारण तेज़ी से होगा।
CEO डॉ. लोकेश एम ने सभी विभागों को 15 दिन के अंदर सभी लंबित IGRS मामलों का शत-प्रतिशत और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया है। साथ ही, अब हर सप्ताह CEO स्तर पर इन मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

