नोएडा पुलिस में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर गिरी गाज, थाना प्रभारी और विवेचक निलंबित; DCP सेंट्रल को नोटिस

नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने केस की जांच में लापरवाही बरतने पर थाना फेस-3 के SHO और विवेचक को निलंबित कर दिया है। DCP सेंट्रल से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

Partap Singh Nagar
3 Min Read
नोएडा पुलिस में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर गिरी गाज, थाना प्रभारी और विवेचक निलंबित; DCP सेंट्रल को नोटिस

गौतमबुद्ध नगर | भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस महकमे के भीतर उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने एक संवेदनशील मामले में जांच के दौरान हुई गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। मामला थाना फेस-3 से जुड़ा है, जहाँ एक पीड़िता की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में उचित धाराएं न जोड़ने के कारण कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी (SHO) पुनीत कुमार और महिला विवेचक उप-निरीक्षक प्रीति गुप्ता को निलंबित कर दिया है। इतना ही नहीं, पर्यवेक्षण में चूक को लेकर डीसीपी सेंट्रल शक्ति मोहन अवस्थी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिससे महकमे के उच्चाधिकारियों में भी खलबली मची हुई है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, 17 मार्च 2026 को थाना फेस-3 में एक महिला ने मुकदमा संख्या 111/2026 दर्ज कराया था, जिसमें बी.एन.एस. की धारा 69, 351 और 308 के तहत FIR लिखी गई थी। हालांकि, जब पुलिस कमिश्नर ने इस हाई-प्रोफाइल केस की समीक्षा की, तो पाया गया कि मामले की गंभीरता के बावजूद इसमें ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ की धारा 5(3) और ‘SC/ST एक्ट’ की धारा 3(2)(v) जैसी महत्वपूर्ण धाराएं नहीं जोड़ी गई थीं। जांच प्रक्रिया में इस भारी चूक को पुलिस कमिश्नर ने पीड़ितों के न्याय के साथ खिलवाड़ माना और इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई के आदेश दिए।

एसीपी के खिलाफ जांच और जीरो टॉलरेंस का संदेश

इस प्रकरण में केवल निलंबन ही नहीं हुआ है, बल्कि एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा उमेश यादव के खिलाफ भी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की विभागीय जांच का जिम्मा एडीसीपी नोएडा को सौंपा गया है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट किया है कि विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नरेट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रहेगी, ताकि भविष्य में विवेचना के दौरान किसी भी सुसंगत धारा को छोड़ने की गलती दोबारा न हो।

Spread the love
Share This Article
Follow:
समाज, राजनीति और क्राइम पर पैनी नजर– सब कवर! सच्चाई उजागर, मिथक तोड़ता हूं |
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *