नोएडा पोस्टमार्टम हाउस में ‘शर्मनाक’ वसूली: शव को पैक करने के लिए मांगे ₹3000, परिजनों ने खुद बॉडी कवर की; वीडियो वायरल

नोएडा के सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मानवता शर्मसार हुई है। कर्मचारियों ने शव पैक करने के लिए 3000 रुपये मांगे। परिजनों द्वारा खुद बॉडी पैक करने का वीडियो वायरल।

Partap Singh Nagar
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नोएडा पोस्टमार्टम हाउस में 'शर्मनाक' वसूली: शव को पैक करने के लिए मांगे ₹3000, परिजनों ने खुद बॉडी कवर की; वीडियो वायरल

Noida / भारतीय टॉक न्यूज़: दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। सेक्टर-94 स्थित सरकारी पोस्टमार्टम हाउस में कर्मचारियों द्वारा एक मृत देह को कवर करने और पैक करने के बदले परिजनों से कथित तौर पर 3,000 रुपये की अवैध मांग की गई। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।

इंसानियत शर्मसार: खुद बॉडी पैक करने को मजबूर हुए परिजन

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारी शव को सम्मानजनक तरीके से पैक करने के लिए पैसों की मांग कर रहे थे। जब दुखी परिजनों ने इस अवैध वसूली का विरोध किया और पैसे देने में असमर्थता जताई, तो कर्मचारियों ने शव को वैसे ही छोड़ दिया। मजबूरन, परिजनों को खुद अपने हाथों से शव को पोस्टमार्टम के कपड़ों (कफन/कवर) में लपेटना और पैक करना पड़ा। यह न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि एक शोक संतप्त परिवार की भावनाओं के साथ क्रूर मजाक भी है।

सरकारी नियमों की सरेआम धज्जियां

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और सरकारी नियमों के अनुसार, सरकारी पोस्टमार्टम हाउस में शव को कवर करने, सील करने और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क प्रदान की जानी चाहिए। इसके लिए परिजनों से एक रुपया भी लेना कानूनी रूप से अपराध है। नोएडा की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन करने के बजाय किस तरह लाचार लोगों का शोषण किया जा रहा है।

जांच के घेरे में स्वास्थ्य विभाग

हालांकि, इस मामले में अभी तक पीड़ित परिवार की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन वीडियो के सोशल मीडिया पर फैलने के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। लोग इस वीडियो को साझा कर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग किस कदर संवेदनहीन हो चुके हैं कि उन्हें मौत के बाद भी ‘कमीशन’ और ‘वसूली’ की चिंता रहती है।

अब देखना यह होगा कि वीडियो का संज्ञान लेकर नोएडा स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इन दोषी कर्मचारियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी जिल्लत का सामना न करना पड़े।

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