नोएडा : महिला वकील से बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप में SHO लाइन हाजिर

Partap Singh Nagar
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नोएडा : महिला वकील से बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप में SHO लाइन हाजिर

Noida / भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है। सेक्टर-126 थाने में एक महिला वकील के साथ हुई कथित बर्बरता और यौन उत्पीड़न के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद जिला पुलिस प्रशासन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित थाना प्रभारी (SHO) भूपेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि कोई भी पद पर रहते हुए साक्ष्यों को प्रभावित न कर सके।

घटना का विवरण और गंभीर आरोप

यह पूरा मामला 3 दिसंबर का है, जब पीड़ित महिला वकील अपने एक घायल मुवक्किल (Client) की प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सेक्टर-126 थाने पहुंची थीं। महिला वकील का आरोप है कि वहां उनकी मदद करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। याचिका में लगाए गए आरोप अत्यंत विचलित करने वाले हैं, जिनमें अवैध हिरासत में रखना, शारीरिक यातना देना और यौन उत्पीड़न जैसे संगीन मामले शामिल हैं। आरोप यह भी है कि पुलिस ने सबूतों को मिटाने के उद्देश्य से थाने के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए थे और महिला का मोबाइल छीनकर उसमें मौजूद महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य डिलीट करवा दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सख्त निर्देश

इस मामले की गूँज जब देश की शीर्ष अदालत में पहुँची, तो जस्टिस की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से गौतमबुद्धनगर की पुलिस आयुक्त को आदेश दिया है कि घटना वाले दिन के तमाम सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें एक सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश किया जाए। अदालत के इस हस्तक्षेप ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि महिला वकील ने खुद को जान से मारने की धमकी मिलने की बात भी अदालत को बताई है।

प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की राह

अपर पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है। SHO को हटाने का निर्णय इसलिए लिया गया ताकि पीड़ित पक्ष को यह विश्वास रहे कि जांच बिना किसी दबाव के हो रही है। इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 7 जनवरी 2026 को निर्धारित है, जिस पर पूरे कानूनी जगत और आम जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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