ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक पदयात्रा: गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

Padyatra from Greater Noida to Delhi: Demand to declare cow as the national animal

Bharatiya Talk
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ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक पदयात्रा: गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

Greater Noida /भारतीय टॉक न्यूज़ (संवाददाता) : ग्रेटर नोएडा, भारत – गौ माता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने और देशभर में गायों को सड़कों पर आवारा घूमने से बचाने के लिए एक कानून बनाने की मांग को लेकर संदीप नागर नामक एक युवक ने एक प्रेरणादायक पदयात्रा शुरू की है। यह यात्रा ग्रेटर नोएडा के ग्राम अमरपुर से शुरू होकर दिल्ली स्थित प्रसिद्ध मां कालका मंदिर में समाप्त होगी।

संदीप नागर: एक अकेला पथिक, एक महान उद्देश्य

हाथ में एक ध्वज लेकर और मन में दृढ़ संकल्प लिए, संदीप नागर ने गौ माता के सम्मान और सुरक्षा के लिए यह कठिन यात्रा शुरू की है। उनका मानना है कि गाय, जिसे हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, को राष्ट्र के प्रतीक के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और गाय को “राष्ट्रीय पशु” घोषित करने का आग्रह किया है।

 ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक पदयात्रा: गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

नागर ने अपनी यात्रा के दौरान कहा, “यह देखकर बहुत दुख होता है कि जिस गौ माता को हम पूजते हैं, वह आज सड़कों पर कचरा खाने और दुर्घटनाओं का शिकार होने के लिए मजबूर है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरी प्रधानमंत्री जी से केवल यही विनती है कि वह एक ऐसा मजबूत कानून बनाएं जिससे कोई भी गाय सड़क पर बेसहारा न दिखे और उन्हें उचित आश्रय और सम्मान मिले।”

यात्रा का मार्ग और उद्देश्य

ग्राम अमरपुर से शुरू हुई यह पदयात्रा कई गांवों और कस्बों से होकर गुजरेगी, जहां संदीप नागर लोगों को अपने मिशन के बारे में जागरूक करने की योजना बना रहे हैं। उनकी यात्रा का समापन दिल्ली के मां कालका मंदिर में होगा, जहां वह पूजा-अर्चना कर अपनी मांगों को भगवान के समक्ष रखेंगे और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की प्रार्थना करेंगे।

इस पदयात्रा का दोहरा उद्देश्य है:

गौ माता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा: गाय को वह सम्मान दिलाना जिसकी वह भारतीय संस्कृति और परंपरा में हकदार है।

सड़क पर कोई आवारा गाय नहीं: एक राष्ट्रव्यापी कानून की मांग जो यह सुनिश्चित करे कि गायों को उनके मालिकों द्वारा छोड़ा न जाए और उन्हें सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जाए।

 

 

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