ग्रेटर नोएडा | भारतीय टॉक न्यूज़: जनपद के चर्चित स्क्रैप माफिया रवि काना की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में रवि काना की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने न तो पिछले मामलों में मिली जमानत की शर्तों का पालन किया और न ही पुलिस विवेचना में कोई सहयोग दिया, ऐसे में उसे राहत देना उचित नहीं है।
क्या था 5 करोड़ की रंगदारी का मामला?
जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, यह मामला नोएडा के सेक्टर-39 थाने में दर्ज एफआईआर (FIR) से जुड़ा है। 21 फरवरी 2026 को आलोक कुमार द्विवेदी नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह एक शादी समारोह से लौट रहे थे, तब सेक्टर-42 के पास बाइक सवार दो युवकों ने उन्हें रोका। उन युवकों ने रवि काना और पंकज पाराशर का नाम लेते हुए जान से मारने की धमकी दी और 5 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की। पुलिस ने इस मामले में रवि काना, पंकज पाराशर और दो अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रवि काना के पिछले आचरण पर भी गौर किया। अदालत ने पाया कि अभियुक्त को एक अन्य मामले में पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी थी, जो उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच में सहयोग के आधार पर दी गई थी। लेकिन आरोपी ने विवेचनाधिकारी (IO) से दूरी बना ली और जांच में शामिल होने के बजाय भागता रहा।
सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा:
“अभियुक्त की तरफ से अग्रिम जमानत मांगने का आधार पर्याप्त नहीं है। पूर्व में मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन और विवेचना में असहयोग यह सिद्ध करता है कि आरोपी कानून की प्रक्रिया का सम्मान नहीं कर रहा है।”
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब पुलिस रवि काना और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। गैंगस्टर एक्ट और रंगदारी जैसे गंभीर मुकदमों में वांछित रवि काना के स्क्रैप साम्राज्य और उससे जुड़े नेटवर्क पर नोएडा पुलिस और एसटीएफ (STF) की पैनी नजर है। जमानत अर्जी खारिज होने से अब पुलिस के पास आरोपी की गिरफ्तारी के लिए रास्ता साफ हो गया है।

