गौतमबुद्धनगर / भारतीय टॉक न्यूज़: बांदा जेल से कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना उर्फ रवि नागर की ‘रहस्यमयी’ रिहाई ने उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। सेंट्रल नोएडा जोन की एसओजी (SOG) सहित छह विशेष पुलिस टीमों ने गैंगस्टर को दबोचने के लिए पश्चिमी यूपी से लेकर नेपाल बॉर्डर तक डेरा डाल दिया है। पुलिस को अंदेशा है कि रवि काना विदेश भागने की फिराक में है, जिसे रोकने के लिए अब रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सुनियोजित थी रिहाई: जेल गेट पर खड़ी थीं गाड़ियां
पुलिस की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रवि काना की रिहाई कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक वेल-प्लान्ड साजिश थी।
🔸 बाहर खड़ा था ‘बैकअप’: 29 जनवरी की शाम जब रवि जेल से बाहर आया, तो गेट पर दो सफेद लग्जरी कारें पहले से उसका इंतजार कर रही थीं।
🔸मददगारों की पहचान: बताया जा रहा है कि एक कार में रवि की बहन और दूसरी में उसके चचेरे भाई समेत तीन युवक सवार थे।
🔸मौके से फरार: जेल से बाहर निकलते ही रवि अपना सामान गाड़ी में रखकर तेजी से ओझल हो गया। उस वक्त अन्य बंदियों की रिहाई के कारण मची भीड़ का फायदा उठाकर वह सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा।
इंटरपोल की मदद लेगी नोएडा पुलिस
नोएडा पुलिस ने रवि काना के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए इंटरपोल (Interpol) से संपर्क साधा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रेड कॉर्नर नोटिस के लिए आवश्यक दस्तावेज और केस डायरी भेजी जा रही है ताकि दुनिया के किसी भी एयरपोर्ट पर उसे गिरफ्तार किया जा सके।
बांदा में एसओजी का डेरा, सीसीटीवी फुटेज की जांच
सेंट्रल नोएडा पुलिस की एसओजी टीम बांदा में मौजूद है। जेल के बाहर और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों की भी जांच कर रही है जो रिहाई के समय जेल के आसपास एक्टिव थे। तकनीकी सर्विलांस के जरिए रवि के मददगारों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
कठघरे में सुरक्षा व्यवस्था
जिस तरह से एक खूंखार गैंगस्टर कोर्ट के बी-वारंट के बावजूद इतनी आसानी से निकल गया, उसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पहले ही बांदा जेल के कारापाल विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड किया जा चुका है और अब पुलिस उन सफेद कारों के रूट को ट्रेस कर रही है जिनमें माफिया फरार हुआ है।

