Greater Noida/ भारतीय टॉक न्यूज़: गौतम बुद्ध नगर में सरकारी नौकरी छोड़ने वाले शिक्षकों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ़ जहाँ लोग सरकारी नौकरी को अपना सपना मानते हैं, वहीं दूसरी ओर यहाँ शिक्षक लगातार अपने पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं। इस्तीफ़े का प्रमुख कारण निर्वाचन (SIR) कार्य में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में लगाई गई ड्यूटी से उपजा भारी मानसिक तनाव और अधिकारियों का कथित खराब व्यवहार है।
पिछले चार दिनों में दो सरकारी शिक्षकों ने अपना पद छोड़ दिया है। ताज़ा मामला मंगलवार (आज) का है, जब प्राथमिक विद्यालय हाजीपुर की अध्यापिका कविता नागर ने ज़िलाधिकारी (DM) और ज़िला निर्वाचन अधिकारी मेधा रूपम को अपना इस्तीफ़ा सौंपा।

20 साल की सेवा के बाद दिया इस्तीफ़ा: ‘मानसिक रूप से परेशान हूँ’
डीएम को लिखे अपने इस्तीफ़े में अध्यापिका कविता नागर ने अपनी 20 वर्षों की सरकारी सेवा का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि BLO के रूप में फ़ील्ड में काम करने के दौरान लोगों और विभाग के अधिकारियों का व्यवहार अत्यंत ख़राब रहा है, जिसके कारण वह मानसिक रूप से काफ़ी परेशान हो गई हैं। उन्होंने तत्काल अपना इस्तीफ़ा स्वीकार करने का निवेदन किया है।
ज्ञात हो कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। तीन दिन पहले ही उच्च प्राथमिक विद्यालय गेझा की अध्यापिका पिंकी सिंह ने भी SIR कार्य में BLO ड्यूटी से अत्यधिक परेशान होकर इस्तीफ़ा दे दिया था, जिससे ज़िले के शिक्षा जगत में पहले से ही हड़कंप मचा हुआ है।
शिक्षक संघ में भारी रोष: ‘दंडात्मक कार्यवाही बर्दाश्त नहीं’
शिक्षकों के लगातार इस्तीफ़े पर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।
🔸मेघराज भाटी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा, “शिक्षक अपना कार्य पूरी लगन से करते हैं, इसके बावजूद उन पर की जाने वाली दंडात्मक कार्यवाही से शिक्षक समुदाय अपमानित महसूस कर रहा है। शिक्षकों का मनोबल बुरी तरह गिर रहा है।”
🔸प्रवीण शर्मा, ज़िलाध्यक्ष, शिक्षक संघ ने कहा, “जिस देश में शिक्षकों को भगवान का दर्जा दिया जाता हो, वहाँ इस प्रकार की दंडात्मक और अपमानित कार्यवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।”
शिक्षकों का आरोप है कि BLO की ड्यूटी शिक्षण कार्य पर भारी पड़ रही है, और इसके साथ ही विभाग का दबाव और अमर्यादित व्यवहार उनकी मानसिक शांति भंग कर रहा है, जिसके चलते वे मज़बूरन सरकारी नौकरी छोड़ रहे हैं।

