उन्नाव बलात्कार मामला : सत्ता, संवेदनहीनता और संघर्षशील न्याय की कहानी
Delhi/ भारतीय टॉक न्यूज़: हम भारतीयों की फितरत में यह शुमार हो चुका है कि हम जिन चीजों को भी पूजनीय योग्य बनाते हैं सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं का करते हैं। हमने नदियों को पूजनीय बनाया तो उनको बर्बाद किया हमने गाय को माता माना तो उनके हालात देखिए हमने पर्वतों को नहीं बख्शा और जिनके लिए यह श्लोक गढा गया कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” उन नारियों को कितना पूजनीय बनाकर रखा उसका निर्णय आप खुद करना इस घटना को पढकर।
उन्नाव बलात्कार मामला
जून 2017 उन्नाव जिले का माखी गाँव जहाँ एक नाबालिग बेटी के साथ बालात्कार किया जाता है और आरोप लगता है सत्ताधारी दल के विधायक कुलदीप सेंगर के ऊपर।
घटना के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने न्याय पाने के लिए स्थानीय पुलिस थानों के चक्कर लगाए, लेकिन आरोपी की राजनीतिक पहुँच और दबदबे के कारण पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। भारतीय कानुन प्रणाली कि निष्पक्षता को मेहसूस किजिए और देखिए कि यदि सामने राजनीतिक सफेदपोश के दागदार नेता हो तो कैसे खाकी कि कलम कांपती है। अपराध कितना भी जघन्य क्यों ना हो लेकिन यदि आरोपी सत्ता से जुडाव रखता हो तो कानून के लंबे हाथ भी बेबस नजर आते हैं।
तमाम कोशिशों के बाद भी जब रिपोर्ट नहीं लिखी गई तब उस बेटी ने अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्महत्या कि कोशिश कि तब जाकर रिपोर्ट लिखी गई
और ये संघर्ष कार्यवाही के लिए नहीं बल्कि महज़ रिपोर्ट दर्ज कराने तक के लिए था अब अंदाजा लगाइये कि तथाकथित रामराज्य में बेटीयाँ कि क्या इज्ज़त हैं?
इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से मामला दर्ज किया गया और जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। हालाँकि, इस दौरान भी पीड़िता और उसके परिवार को लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। जून 2018 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख मिलने के बावजूद, इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए।
जुलाई 2019 में एक और भयावह घटना सामने आई, जब पीड़िता अदालत में बयान देने जा रही थी। रायबरेली मार्ग पर एक ट्रक ने उसकी कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी दो चाचियों की मृत्यु हो गई।
एक बेटी अपनी इज्ज़त के लिए लडी, और इस लडाई में गवा दिया उसने अपना पुरा परिवार सत्ताधारियो के खिलाफ़ लड़ाई लडना आसान नहीं है।
पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित करने का आदेश दिया। दिल्ली की अदालत में निष्पक्ष और तेज़ सुनवाई के बाद दिसंबर 2019 में कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार का दोषी ठहराया गया। इसके पश्चात जनवरी 2020 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही पीड़िता को ₹25 लाख का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया गया।
उन्नाव बलात्कार मामला /भाजपा कि भूमिका
जिस पार्टी का उदय ही श्री राम जी के नाम पर हुआ हो उसमें कितनी नैतिकता बची है अब उसको पढिए।
- भाजपा विधायक पर बालात्कार का आरोप लगा जून 2017 में, सत्ता के दबाव में कोई शिकायत तक दर्ज नहीं हुईं।
- पीड़िता दर दर भटकती रहीं और अपराधी माननीय विधायक बने रहे।
- पीड़िता के चाचा व पिता के साथ मारपीट होती और सत्ता कि हनक देखिए कि जेल भी चाचा और पिता ही जातें हैं।
- पीड़िता के पिता कि जेल में रहस्यमयी तरीके से मौत हो जाती है कोई कार्यवाही नहीं होती।
- पीड़िता मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्महत्या का प्रयास करतीं हैं तब भी आरोपी कि विधायकी बनी रहती है।
- आरोपी विधायक बना रहा, पीड़िता के परिवार को खत्म करता रहा और भाजपा अपने का बचाव करती रही।
- मामला राष्ट्रीय हुआ लोगों में रोष हुआ तब जाकर भाजपा कि निंद टुटी और अपना मन मारकर मुख्यमंत्री योगी जी को अपने सजातीय को निलंबित करना पड़ा।
भाजपा के रामराज्य में योगी जी के बुलडोजर राज में तथा कानून कि दुहाई देते योगी जी पर एक विधायक कि गुंडागर्दी नहीं रुक सकी और अंततः विधायक के आतंक कि वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दिल्ली स्थानांतरित करना पड़ा।
क्या ये सब हमारे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर जोरदार तमाचा नही है कि एक आरोपी नही बल्कि पीड़िता असुरक्षित हैं भाजपा एक बेटी कि सुरक्षा का जिम्मा तक उठाने में सक्षम नहीं है और बात करते हैं हम राम राज्य कि?
एक बेटी कि इज़्ज़त से ज्यादा जरूरी है पार्टी का साथ,हम कितना गिर गए? 2014 के बाद का बदलाव मुबारक हो दोस्तों।
अदालतों कि राजनीतिक मजबूरी
यदि आप रेपिस्ट है और सत्ताधारी दल से आपका जुडाव है या आपकी उसमें हिस्सेदारी है तो आप बेफिक्र रहो हमारे देश का कानून आपका साथ बड़ी इमानदारी से देगा ।
उदाहरणतः राम रहीम, आसाराम, कुलदीप सिंह सेंगर। एक लंबी फेहरिस्त है जहाँ आपको दिखेंगा कानून का साथ रेपिस्टो के साथ।
सत्ताधारी दल का पूर्व विधायक योगी जी का सजातीय जो महज आरोपी नही बल्कि अपराधी सिद्ध हो चुका है 17 वर्ष कि मासूम नाबालिग लडकी के साथ रेप के आरोप में जिसको कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी उसकों न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर ने दया दिखाते हुए आरोपी कि सज़ा को निलंबित कर दिया है ।
निम्नलिखित शर्तों के साथ
₹15 लाख का निजी मुचलका और 3 समान राशि की जमानतें देना
पीड़िता के घर के 5 किमी के अंदर नहीं आना
किसी भी तरह की धमकी नहीं देना
❗ यदि शर्तें तोड़ीं तो जमानत रद्द हो सकती है।
दुसरी शर्त देखिए 5 किमी के अंदर नहीं आना क्योंकि कोर्ट को पता है कि पीड़िता को अभी भी अपराधी से खतरा है और रामराज्य कि सरकार पीड़िता कि सुरक्षा में असमर्थ।
और भाजपा सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर का उस बेटी के ऊपर हंसना और भाजपा सरकार के दुसरे मंत्री दयाशंकर सिंह का कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करना दर्शाता है भाजपा के संस्कारों को, खैर अजीब खेल चल रहा है चलते रहने दिजिए आप मूकदर्शक बने रहिये क्योंकि पीड़िता आपकी बेटी तो है नहीं और ना वो दौर रहा जिसमें कहा जाता था बेटीयाँ सबकी सांझी विरासत होती है।
कोर्ट के फैसले पर पीड़िता कि प्रतिक्रिया।
इस फैसले के खिलाफ पीड़िता दिल्ली में धरने पर बैठी और कहा कि न्याय कि उम्मीद में, मौत जैसा फैंसला सुना गए जज साहब।
देश भर के विरोध के बाद CBI कि आंखें खुली तब जाकर उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
निष्कर्ष
- एक नाबालिग के साथ रेप हुआ।
- उसने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई ।
- आरोपी सत्ताधारी दल के विधायक थे इसलिए पीड़िता कि आवाज़ दबाने का भरसक प्रयास किया गया जैसे तैसे करके शिकायत दर्ज हुई। और इस दौरान विधायक ने पीड़िता के परिवार के तमाम सदस्यों को मरवा दिया ।
- अपराधी विधायक पद पर काबिज रहा।योगी जी का सुशासन और कड़ा प्रशासन विधायक के आतंक के सामने घुटने टेक गया ।
- पीड़िता को तथाकथित रामराज्य छोड़कर जाना पड़ा और अपराधी विधायक को सज़ा हुई तो जज साहब को विधायक पर दया आ गई।
एक बेटी का अपराध बस इतना कि उसने खामोशी के बजाय अपने लिए लडना चुना और अपराधी कि काबिलियत ये कि सत्ता धारी दल से जुडाव रखता है
कहानी तथाकथित रामराज्य की …?

