Uttar Pardesh / भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट विधानसभा में पेश कर दिया है, जिसे राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे विशालकाय बजट माना जा रहा है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के इस बजट का कुल आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है। ‘नवनिर्माण के नौ वर्ष’ की थीम पर आधारित यह बजट पूरी तरह से चुनावी तैयारियों और युवाओं, महिलाओं व किसानों को साधने पर केंद्रित नजर आता है। सरकार ने इस बजट के माध्यम से उत्तर प्रदेश को एक ‘अनलिमिटेड पोटेंशियल स्टेट’ के रूप में विश्व पटल पर रखने का प्रयास किया है, जिसमें निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘सुरक्षित नारी, सक्षम युवा और खुशहाल किसान’ का बजट बताते हुए स्पष्ट किया कि बिना कोई नया टैक्स लगाए राज्य को बीमारू श्रेणी से बाहर निकालकर देश की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है।
बजट में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश में लगभग 10 लाख नई नौकरियों का सृजन संभावित माना जा रहा है। सरकार ने इसके लिए डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप योजना और सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की स्थापना जैसे कदम उठाए हैं, ताकि युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले उद्यमी बन सकें। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को अगले स्तर पर ले जाते हुए उद्योगों के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग की प्रक्रियाओं को ‘जन विश्वास सिद्धांत’ के आधार पर और अधिक सुलभ बनाया जाएगा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बनाने हेतु ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत अगले तीन वर्षों में 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए एआई प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति और मेधावी छात्रों के लिए मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के तहत शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी का भी बड़ा प्रावधान किया गया है।
नारी शक्ति के सशक्तिकरण को बजट के केंद्र में रखते हुए योगी सरकार ने बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर अब एक लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है, जो महिला कल्याण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग से प्रशिक्षण केंद्र और कौशल संवर्धन केंद्रों की स्थापना की जाएगी, वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। महिला उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना लाई गई है, जिसके तहत एयरपोर्ट और बस स्टेशनों जैसे प्रमुख स्थानों पर उनके शोरूम का किराया शुरुआती तीन वर्षों तक सरकार वहन करेगी। इसके अलावा स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए छात्राओं को निशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने हेतु 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होगा।
अन्नदाता किसानों और ग्रामीण विकास के लिए भी बजट में खजाना खोला गया है, जिसमें पारंपरिक खेती को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। ‘डीजल से सोलर’ की ओर कदम बढ़ाते हुए सरकार ने किसानों के डीजल पंप सेटों को सोलर पंपों में बदलने के लिए 637.84 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है, जिससे खेती की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूती देने के लिए 150 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड बनाया जाएगा, जिससे महिला किसानों को वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना और मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के माध्यम से किसानों के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योजना है, जबकि 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। स्वच्छताकर्मियों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा के लिए सरकार ने सीधे उनके बैंक खातों में 16 से 20 हजार रुपये भेजने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वित्तीय अनुशासन के मोर्चे पर भी सरकार ने शानदार प्रदर्शन किया है और राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 2.98 प्रतिशत पर सीमित रखा है, जो 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कैपिटल एक्सपेंडिचर प्रस्तावित किया गया है, जिससे सड़कों, ऊर्जा और औद्योगिक गलियारों का जाल बिछेगा। ऋण प्रबंधन के मामले में योगी सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य की ऋणग्रस्तता को 30 प्रतिशत से घटाकर 27 प्रतिशत से नीचे लाने में सफलता पाई है और आगामी वर्ष के लिए इसे 23.1 प्रतिशत तक लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सरकार का यह दसवां बजट न केवल वर्तमान की चुनौतियों का समाधान पेश करता है, बल्कि आगामी वर्षों में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक सुदृढ़ आधारशिला रखने का कार्य भी करता है।

