लखनऊ/ भारतीय टॉक न्यूज़: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। शासन ने प्रदेश के 68,236 राज्यकर्मियों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया है। यह कार्रवाई उन कर्मचारियों पर की गई है जिन्होंने बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड नहीं किया था।
वेतन रोकने का मुख्य कारण
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत हर सरकारी कर्मचारी को अपनी वार्षिक संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 31 जनवरी 2026 तक साल 2025 की संपत्ति का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर दिया जाए।
जिन कर्मचारियों ने इस समयसीमा (Deadline) का उल्लंघन किया, उनका वेतन तब तक के लिए फ्रीज कर दिया गया है जब तक वे अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं कर देते।
इन विभागों के कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
शासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, लापरवाही बरतने वालों में सभी श्रेणियों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं:
🔸प्रथम श्रेणी (Group A): 2,628 अधिकारी
🔸 द्वितीय श्रेणी (Group B): 7,204 अधिकारी
🔸 तृतीय श्रेणी (Group C): 34,926 कर्मचारी
🔸चतुर्थ श्रेणी (Group D): 22,624 कर्मचारी
प्रभावित विभागों में मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग (PWD), राजस्व, शिक्षा (बेसिक और माध्यमिक), स्वास्थ्य, समाज कल्याण और पुलिस विभाग शामिल हैं।
सिर्फ वेतन ही नहीं, प्रमोशन पर भी लगेगा ‘ब्रेक’
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि संपत्ति का ब्योरा न देना केवल वेतन रोकने तक सीमित नहीं रहेगा।
1. प्रमोशन पर रोक: जिन कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर नहीं होगा, उनके प्रमोशन (पदोन्नति) के मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा।
2.विभागीय कार्रवाई: निर्देशों की अवहेलना को ‘अनुशासनहीनता’ माना जाएगा और भविष्य में उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा सकती है।
पारदर्शिता के लिए मानव संपदा पोर्टल (eHRMS)
‘मानव संपदा’ पोर्टल को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके जरिए कर्मचारियों की सर्विस बुक, छुट्टी, वेतन और अब संपत्ति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है।

