Greater Noida /भारतीय टॉक न्यूज़ : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) अब पूरी तरह से सख्त रुख अख्तियार कर चुका है। प्राधिकरण ने बुधवार को एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 39 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उन आवंटियों के खिलाफ की गई है, जो बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद अपने भूखंडों की लीज डीड निष्पादित करने में रुचि नहीं दिखा रहे थे। प्राधिकरण की इस बड़ी कार्रवाई के बाद उन आवंटियों में हड़कंप मच गया है जो लंबे समय से जमीन लेकर उस पर काम शुरू करने में लापरवाही बरत रहे थे।
बार-बार नोटिस की अनदेखी पर कड़ा प्रहार
यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है बल्कि इसके पीछे आवंटियों की लंबे समय से चली आ रही लापरवाही जिम्मेदार है। पूर्व में कई बार नोटिस जारी कर सभी आवंटियों को सूचित किया गया था कि वे निर्धारित समय के भीतर औद्योगिक भूखंडों पर कार्य शुरू करने की प्रक्रिया पूरी करें। शासन का मानना है कि जमीन आवंटित होने के बाद भी यदि उद्योग स्थापित नहीं होते हैं, तो इससे प्रदेश की औद्योगिक विकास योजना और रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी पड़ती है। जिन 39 आवंटियों ने प्राधिकरण के अंतिम अल्टीमेटम को भी नजरअंदाज किया और लीज डीड निष्पादित करने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं, उनका आवंटन अब पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है।
मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद हुई समीक्षा बैठक
इस सख्त कार्रवाई की पृष्ठभूमि बीते नवंबर माह में तैयार हुई थी, जब औद्योगिक विकास के मुख्य सचिव ने प्राधिकरण अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की थी। उस दौरान यह तथ्य सामने आया था कि कुल 366 ऐसे आवंटी हैं जिन्होंने आवंटन पत्र मिलने के बाद भी डीड का निष्पादन नहीं कराया है। इस बैठक में सख्त निर्देश दिए गए थे कि औद्योगिक विकास में बाधक बन रहे ऐसे आवंटियों को एक अंतिम अवसर दिया जाए और फिर भी प्रक्रिया पूरी न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में प्राधिकरण ने सभी को अंतिम नोटिस भेजा था, जिसके बाद अधिकांश आवंटियों ने तो अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली, लेकिन इन 39 आवंटियों ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी।
विविध सेक्टरों के आवंटियों पर गिरी गाज
प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निरस्त किए गए भूखंड किसी एक श्रेणी के नहीं हैं, बल्कि इसमें औद्योगिक निवेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्लाट शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन 39 आवंटनों को निरस्त किया गया है, उनमें सबसे अधिक जनरल इंडस्ट्री के 19 प्लाट शामिल हैं। इसके अलावा एमएसएमई (MSME) पार्क के 12 भूखंडों का आवंटन रद्द हुआ है, जबकि हैंडीक्राफ्ट पार्क के 5 और टाय पार्क के 3 आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्राधिकरण अब इन रिक्त हुए भूखंडों को नई योजनाओं के माध्यम से उन गंभीर उद्यमियों को आवंटित करेगा जो वास्तव में यहां उद्योग स्थापित कर विकास में सहभागी बनना चाहते हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और भविष्य की कार्रवाई
यमुना प्राधिकरण ने सभी 39 आवंटियों को उनके आवंटन निरस्त होने की सूचना व्यक्तिगत रूप से भेज दी है। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक भूखंडों पर कब्जा लेकर उन्हें खाली छोड़ना निवेश के नियमों का उल्लंघन है। इस कार्रवाई का उद्देश्य स्पष्ट संदेश देना है कि प्राधिकरण केवल जमीन आवंटित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आवंटित भूखंडों पर उद्योगों का संचालन सुनिश्चित करना भी उसकी प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में उन आवंटियों पर भी तलवार लटक सकती है जिन्होंने लीज डीड तो करा ली है लेकिन निर्माण कार्य या उत्पादन शुरू करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।

