मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का मामला: बार काउंसिल की बड़ी कार्रवाई, वकील का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित

Case of shoe throwing at Chief Justice: Bar Council takes major action, lawyer's license suspended with immediate effect

Partap Singh Nagar
3 Min Read

 

 

New Delhi/ भारतीय टॉक न्यूज़ : भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को हुई एक अभूतपूर्व और शर्मनाक घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने का प्रयास करने वाले अधिवक्ता राकेश किशोर का वकालतनामा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस घटना को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला मानते हुए BCI ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है।

देश भर में वकालत करने पर लगी रोक

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए सख्त आदेश के अनुसार, अधिवक्ता राकेश किशोर को अगले आदेश तक भारत की किसी भी अदालत, न्यायाधिकरण या किसी भी कानूनी प्राधिकरण के समक्ष पेश होने या वकालत करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। BCI ने स्पष्ट किया है कि यह कृत्य केवल एक न्यायिक अधिकारी पर हमला नहीं, बल्कि भारतीय संविधान और न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों पर एक सोची-समझी चोट है।

 मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का मामला: बार काउंसिल की बड़ी कार्रवाई, वकील का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित

 मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का मामला: बार काउंसिल की बड़ी कार्रवाई, वकील का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित

कारण बताओ नोटिस जारी, 15 दिनों में देना होगा जवाब

काउंसिल ने इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए राकेश किशोर को एक कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस में वकील से 15 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने के लिए कहा जाएगा कि उनके लाइसेंस का निलंबन स्थायी क्यों न कर दिया जाए और उनके खिलाफ और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इसके साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिल्ली बार काउंसिल को इस निलंबन के आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। इसमें वकील के नाम को आधिकारिक रजिस्टर में निलंबित के रूप में दर्ज करना और दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी अदालतों को इस फैसले की सूचना देना शामिल है।

BCI ने की घटना की कड़ी निंदा

इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा, “भारत के मुख्य न्यायाधीश पर सुप्रीम कोर्ट के भीतर इस तरह का हमला न केवल व्यक्तिगत रूप से उन पर, बल्कि સમગ્ર न्यायपालिका और संवैधानिक मूल्यों पर भी हमला है। यह घटना देश के हर नागरिक और विशेष रूप से कानूनी बिरादरी के लिए शर्मनाक है। न्याय की गरिमा को बनाए रखने के लिए इस पर कठोरतम रुख अपनाना आवश्यक था।”

गौरतलब है कि घटना के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने असाधारण संयम का परिचय दिया था। उन्होंने इस अप्रत्याशित कृत्य से विचलित हुए बिना शांति बनाए रखी और अदालत की कार्यवाही को निर्बाध रूप से जारी रखने का निर्देश दिया। हालांकि, इस घटना ने पूरे देश में अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के बीच गहरी चिंता और आक्रोश को जन्म दिया है।

 

 

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