Lucknow / भारतीय टॉक न्यूज़ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने करीब 9 साल बाद लखनऊ में एक विशाल महारैली कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बसपा 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किसी भी दल से गठबंधन किए बिना अकेले लड़ेगी। अपने एक घंटे से लंबे भाषण में मायावती पुराने तेवर में नजर आईं, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा, वहीं एक मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की तारीफ भी की। साथ ही उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी होने का भी स्पष्ट संकेत दे दिया।
2027 का रण, अकेले लड़ेगी बसपा
कांशीराम स्मारक स्थल पर जुटी हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए मायावती ने 2027 के लिए पार्टी की रणनीति साफ कर दी। उन्होंने कहा, “गठबंधन में चुनाव लड़ने से बसपा को कभी फायदा नहीं हुआ। हमारे वोट तो सहयोगी दलों को ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन उनके सवर्ण और फॉरवर्ड वोट हमें कभी नहीं मिलते।” उन्होंने 2007 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जब पार्टी अकेले लड़ी थी, तभी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल हुई थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने के लिए जुटने का आह्वान किया।
“में सपा मुखिया अखिलेश यादव से पूछना चाहती हूं कि अगर मान्यवर श्री कांशीराम साहब के प्रति इतना ही आदर सम्मान था
तो आपने मान्यवर श्री कांशीराम साहब जी के नाम पर रखे जिले का नाम बदलकर कासगंज क्यों कर दिया ?”
~ आदरणीय बहन कु• मायावती जी pic.twitter.com/603ymNVqGz
— BSP (@Bsp4u) October 9, 2025
सपा-कांग्रेस पर हमला, योगी सरकार की सराहना
मायावती के निशाने पर सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी रही। उन्होंने सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को “हवा-हवाई” और “दोगलापन” करार दिया। उन्होंने कहा, “सपा सरकार ने हमेशा गुंडों, माफियाओं और अराजक तत्वों को संरक्षण दिया और पदोन्नति में आरक्षण को लगभग खत्म कर दिया था।”
कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता संविधान हाथ में लेकर सिर्फ “नाटकबाजी” करते हैं, जबकि आपातकाल के दौरान उन्होंने ही संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस ने बाबासाहेब आंबेडकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया।

इस बीच, मायावती ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए योगी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में बने स्मारकों और पार्कों के टिकट से होने वाली आय को सपा सरकार ने रखरखाव पर खर्च नहीं किया, जिससे उनकी हालत जर्जर हो गई थी। उन्होंने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर आग्रह किया था, जिसके बाद वर्तमान भाजपा सरकार ने इस पैसे को रखरखाव पर खर्च करना सुनिश्चित किया, इसके लिए हमारी पार्टी उनकी आभारी है।” इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए X पर लिखा, “क्योंकि उनकी अंदरूनी साठ-गांठ जारी है, इसीलिए वो ज़ुल्म करने वालों की आभारी हैं।”
आकाश आनंद होंगे उत्तराधिकारी, चंद्रशेखर पर निशाना
मंच से मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी बनाने का स्पष्ट संकेत दिया। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार कांशीराम जी ने मुझे आगे बढ़ाया, उसी तरह मैंने आकाश आनंद को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। वह मेरे दिशानिर्देश में काम करेंगे।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे आकाश का भी उनकी तरह ही साथ दें।
बिना नाम लिए उन्होंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “दलित वोटों को बांटने के लिए स्वार्थी और बिकाऊ किस्म के लोगों का इस्तेमाल करके संगठन बनवाए जा रहे हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।”

महारैली की मुख्य बातें:
🔸बड़ा शक्ति प्रदर्शन: लखनऊ के कांशीराम स्मारक में बिहार, पंजाब और हरियाणा समेत 5 राज्यों से लाखों समर्थक पहुंचे। डेढ़ लाख की क्षमता वाला स्थल पूरी तरह भरा हुआ था।
🔸 बदला हुआ मंच: पहली बार मायावती की रैली में मंच पर उनके अलावा अन्य नेताओं को भी सोफे पर बैठने की जगह दी गई, जिसमें दलित, मुस्लिम, ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेताओं को प्रतिनिधित्व मिला।
🔸आजम खान की अटकलों पर विराम: मायावती ने आजम खान के बसपा में शामिल होने की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, “मैं किसी से छिपकर नहीं मिलती, जब भी मिलती हूं, खुलकर मिलती हूं।”
🔸 कार्यकर्ताओं का आभार: उन्होंने कहा कि रैली में आई भीड़ दिहाड़ी पर नहीं लाई गई है, बल्कि ये कार्यकर्ता अपने खून-पसीने की कमाई से खुद चलकर आए हैं।
2012 में सत्ता से बाहर होने और 2024 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने के बाद, बसपा के लिए इस महारैली को एक “संजीवनी” के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने पार्टी कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार किया है।

