जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ; शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी सहित कई देशों के CJI हुए शामिल

Justice Surya Kant became the 53rd Chief Justice of India, administered the oath by President Murmu; CJIs of several countries, including PM Modi, attended the swearing-in ceremony.

Partap Singh Nagar
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जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ; शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी सहित कई देशों के CJI हुए शामिल

 

New Delhi /भारतीय टॉक न्यूज़: देश की न्यायपालिका के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस भूषण रामकृष्ण (बी.आर.) गवई का स्थान लिया, जो रविवार शाम को सेवानिवृत्त हुए।

शपथ ग्रहण समारोह की मुख्य बातें

समारोह स्थल: राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।

शपथ दिलाने वाली: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।

उपस्थिति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कानून मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश, गणमान्य व्यक्ति, और विदेशी न्यायिक प्रतिनिधिमंडल।

जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी, 2027 तक रहेगा, जिसमें वे लगभग 15 महीनों तक देश के शीर्ष न्यायिक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

ऐतिहासिक रहा शपथ समारोह

 जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ; शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी सहित कई देशों के CJI हुए शामिल

जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। यह पहली बार हुआ जब छह से सात देशों के मुख्य न्यायाधीशों और जजों ने किसी भारतीय CJI के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के न्यायिक प्रमुख शामिल थे, जो भारत की न्यायिक शक्ति और संबंधों को दर्शाता है।

जस्टिस सूर्यकांत के महत्वपूर्ण फैसले

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, जस्टिस सूर्यकांत कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी मामलों से जुड़े रहे हैं। उनकी पीठों द्वारा लिए गए कुछ प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:

अनुच्छेद 370: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के मामले पर फैसला देने वाली पीठ का वे हिस्सा रहे।

राजद्रोह कानून: उन्होंने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून (धारा 124ए) पर नई FIR दर्ज करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

पेगासस मामला: उन्होंने पेगासस स्पाइवेयर के कथित उपयोग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU): वह सात-न्यायाधीशों की उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार करने का मार्ग प्रशस्त किया।

हरियाणा के छोटे शहर से CJI तक का सफर

जस्टिस सूर्यकांत का सफर एक छोटे से शहर से शुरू होकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक कहानी है। हरियाणा के हिसार से वकालत की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में मास्टर डिग्री ‘फर्स्ट क्लास फर्स्ट’ के साथ पूरी की। उन्हें 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, और 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।

 

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