नई दिल्ली/नोएडा/ भारतीय टॉक न्यूज़: नोएडा और ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट परियोजनाओं में हजारों परिवारों का सपना अधूरा छोड़ने वाले जेपी ग्रुप (Jaypee Group) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने ग्रुप की विभिन्न कंपनियों से जुड़ी करीब 400 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
25 हजार खरीदारों के साथ विश्वासघात
जांच एजेंसी के अनुसार, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड ने नोएडा की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के लिए 25,000 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 14,599 करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि का उपयोग मकान बनाने में करने के बजाय, ग्रुप ने इसे अपनी अन्य कंपनियों जैसे जेपी हेल्थकेयर और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल में डायवर्ट कर दिया।
मनोज गौड़ की गिरफ्तारी और संपत्तियों का ब्योरा
ईडी की जांच में पूर्व प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को इस पूरे फंड डायवर्जन का मास्टरमाइंड बताया गया है। मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
कुर्क की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
🔸जयप्रकाश सेवा संस्थान (ट्रस्ट): इसकी 400 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां।
🔸 पेज 3 बिल्डटेक और हनी कटियाल: इनसे जुड़ी संयुक्त संपत्तियां, जिनका मूल्य भी 400 करोड़ के करीब है।
EOW की शिकायतों से शुरू हुई थी जांच
यह पूरा मामला दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर पर आधारित है। जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स जैसी बड़ी परियोजनाओं के खरीदारों ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की शिकायत की थी। कई खरीदार ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2010 में अपना जीवनभर की कमाई घर के लिए लगा दी थी, लेकिन 15 साल बाद भी उन्हें घर नसीब नहीं हुआ।
आगे क्या होगा?
वर्तमान में जेपी इन्फ्राटेक का अधिग्रहण सुरक्षा ग्रुप द्वारा किया जा चुका है, जबकि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी मिल चुकी है। ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में कुछ और संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

